Weather Forecast: नए साल 2025 में ठंड को लेकर माहौल ज्यादा बना नहीं. क्योंकि कड़ाके की ठंड को लेकर निराशा हाथ लगी है. साल के पहले महीने जनवरी में बढ़े तापमान से रिकॉर्ड टूट गए. भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने बताया कि जनवरी 2024 में रिकॉर्ड बना, जोकि तीसरा सबसे गर्म महीना रहा. इसमें औसत तापमान 18.9 डिग्री सेल्सियस था. यह 1901 के बाद से चौथा सबसे सूखा महीना भी था. यह हाल के इतिहास में सबसे ड्राय सर्दियों के महीनों में से एक था. जनवरी से फरवरी के बीच भारत में असामान्य मौसम पैटर्न देखने को मिल रहा है. मौसम विज्ञानी इसे "शुरुआती वसंत जैसा" फेज बताते हैं, जिसमें ड्राय परिस्थितियां और सामान्य से ज़्यादा तापमान होता है.
ट्रेडिशनली भारत में मार्च और अप्रैल को वसंत का महीना माना जाता था. हालांकि, अब फ़रवरी अप्रैल जैसा लगता है, जो जलवायु परिवर्तन के कारण मौसमी पैटर्न में बदलाव का संकेत दे रहा. मौसम के जानकारों का सुझाव है कि यह कोई अस्थायी बदलाव नहीं है, बल्कि एक लॉ न्ग टर्म बदलावहै जो आखिर में भारत के पारंपरिक वसंत ऋतु को मिटा सकता है.
एग्रीकल्चर और बायोडायवर्सिफिकेशन पर असर
टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के प्रोफेसर अंजल प्रकाश ने बताया कि भारत का प्रिय वसंत ऋतु पर खतरा मंडरा रहा. उन्होंने कहा कि जलवायु पैटर्न में बदलाव के साथ, यह तेजी से क्लियर होता जा रहा है कि वसंत ऋतु, जो कभी नवीनीकरण और कृषि जीवन शक्ति की पहचान थी, खतरे में है. इसका प्रभाव जलवायु से परे भी है.

आईएमडी ने फरवरी में पूरे भारत में खास तौर पर उत्तरी क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश का अनुमान लगाया है. दिन और रात दोनों का तापमान सामान्य से ज़्यादा रहने की उम्मीद है. स्काईमेट के महेश पलावत ने बताया कि दिसंबर और जनवरी में कमज़ोर पश्चिमी विक्षोभ के कारण बर्फबारी कम हुई और सर्दियों में बारिश भी कम हुई. इसके अलावा, दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व से आने वाली आर्द्र हवाओं ने ठंडी उत्तरी हवाओं को रोक दिया, जिससे न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक हो गया.
हिमालयी क्षेत्र में ऐतिहासिक रूप से कम बर्फबारी के कारण काफी प्रभाव देखने को मिल रहा है. श्रीनगर के क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के मुख्तार अहमद ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में बताया कि हाल ही में बर्फबारी नहीं हुई है. 3 हफ्ते से अधिकतम तापमान सामान्य से 6-8 डिग्री सेल्सियस अधिक है. उन्होंने कहा कि सर्दियां, जो परंपरागत रूप से अक्टूबर से मार्च तक रहती थीं, अब केवल दिसंबर और जनवरी तक ही सीमित रह गई हैं.
वैश्विक जलवायु का ट्रेंड
क्लाइमेट सेंट्रल ने पिछले कुछ सालों में ग्लोबल लेवल पर फरवरी के तापमान में बढ़त देखी है. इस ट्रेंड के कारण सर्दी अचानक गर्मियों में बदल जाती है. विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने 2024 को रिकॉर्ड पर सबसे गर्म साल घोषित किया है, जिसमें तापमान प्री-इंडस्ट्रियल लेवल से लगभग 1.55 डिग्री सेल्सियस अधिक है. उत्तरी भारत में अब शीत ऋतु बहुत जल्दी समाप्त हो जाती है, जिससे धीरे-धीरे वसंत ऋतु का आगमन नहीं हो पाता.
ठंड में हिमालय के हिस्सों में कम बारिश
क्षेत्र रैन डेफिसिट(%)
उत्तराखंड 86%
जम्मू और कश्मीर 80%
हिमाचल प्रदेश 73%
सिक्किम 82%


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