Warren Buffett Farewell: वॉरेन बफेट ने निवेशकों को दीं 5 गोल्डन टिप्स, हर इनवेस्टर को जाननी चाहिए ये बात

Warren Buffett Farewell Letter: दुनिया के सबसे सम्मानित निवेशक वॉरेन बफेट ने अपना आखिरी पत्र जारी कर दिया है। इसे पढ़ते ही वैश्विक मार्केट में ऐसा माहौल बन गया मानो एक युग समाप्त होने जा रहा हो। बफेट ने साफ लिखा कि वह अब बर्कशायर हैथवे की सालाना रिपोर्ट नहीं लिखेंगे और न ही सालाना मीटिंग में पहले की तरह लंबा संवाद कर पाएंगे। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा "I'm going quiet", यानी अब वह धीरे-धीरे जिम्मेदारियां सौंप रहे हैं।

Warren Buffett Farewell Letter

इस पत्र में उन्होंने बताया कि साल के अंत तक ग्रेग एबल कंपनी की कमान संभालेंगे। बफेट ने उन्हें ईमानदार, मेहनती और vision रखने वाला मैनेजर बताया।

मार्केट में भावुक माहौल

यह पत्र सिर्फ एक निवेशक का संदेश नहीं था, बल्कि जीवन और समझ का सार था। दुनिया भर के लोगों ने इसे ऐसे पढ़ा जैसे कोई बुजुर्ग मार्गदर्शक अपना अंतिम ज्ञान दे रहा हो।

8 पन्नों के इस पत्र में बफेट ने न नंबरों की बात की न ही फाइनेंशियल रेशियो की। उन्होंने अपनी पुरानी यादें साझा कीं किस्मत और परिवार पर लिखा और बताया कि क्यों वे अब कमान किसी प्रोफेशनल मैनेजर को दे रहे हैं, अपने बच्चों को नहीं।

1. वही जगह चुनें जहां मन को सुकून मिले

बफेट ने बताया कि उन्होंने न्यूयॉर्क छोड़कर अपने छोटे शहर ओमाहा में रहना बेहतर समझा। उसी शांत वातावरण से उन्होंने अरबों डॉलर की कंपनी खड़ी कर दी। उनका मानना है कि जड़ें कभी नहीं छोड़नी चाहिए। भारत में अक्सर लोग समझते हैं कि करियर के लिए शहर बदलना ही सफलता है, लेकिन कई बड़े भारतीय उद्यमी अपने शहर से ही साम्राज्य खड़ा कर चुके हैं।

2. सही समय पर जिम्मेदारी सौंपना सीखें

बफेट 95 वर्ष के हैं, फिर भी उन्होंने कंपनी अपने बच्चों को नहीं दी। उन्होंने ग्रेग एबल को यह पद इसलिए सौंपा क्योंकि व्यवसाय परिवार नहीं, क्षमता पर चलता है। भारत में इसके उलट, कई परिवारिक बिज़नेस तीसरी पीढ़ी तक आते-आते टूट जाते हैं।

3. मौत के बाद सबकुछ नियंत्रित करना बेकार

अपने शेयरों का बड़ा हिस्सा बफेट ने फाउंडेशनों को दान कर दिया। उनका कहना है कि मरने के बाद संपत्ति पर कंट्रोल रखने का कोई फायदा नहीं। यह भारतीय परिवारों के लिए बड़ा सबक है, जहां संपत्ति बंटवारे को लेकर अक्सर तनाव पैदा होता है।

4. दया ही सबसे बड़ा निवेश है

बफेट ने लिखा कि इंसान की असली कीमत उसकी दया से पहचानी जाती है, न कि उसकी दौलत से जिस तरह कोविड के समय लोगों की मदद परिवार और दोस्तों ने की उसी तरह जीवन में दया ही सबसे बड़ा सहारा बनती है।

5. जिंदगी रिटर्न्स से ज्यादा कीमती है

भारतीय निवेशकों के लिए बफेट का यह संदेश बेहद महत्वपूर्ण है बच्चों की मुस्कान, परिवार का समय और अपनी सेहत किसी भी मल्टीबैगर से कीमती है। वह कहते हैं कि ट्रेडिंग ऐप बंद करके परिवार के साथ समय बिताना ही असली फायदा है।

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