नई दिल्ली। देश में बैंकों की मनमानी पर केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने कड़ा कदम उठाया है। सीबीडीटी ने बैंकों से कहा है कि वह मनमाना चार्ज नहीं वसूल सकते हैं। और अगर ऐसा चार्ज वसूला है तो उसे तुरंत ग्राहकों को वापस करें। सीबीडीटी ने साफ साफ कहा है कि ऐसा न करने वाले बैंकों पर सख्त कार्रवाई हो सकती है।
जानिए क्या है मामला
यूपीआई आधारित डिजिटल पेमेंट पर आरबीआई ने शुल्क हटा दिया है। ऐसे में अब देश में कोई भी व्यक्ति यूपीआई आधारित डिजिटल पेमेंट चाहे जितने बार फ्री में कर सकता है। लेकिन देश के कई बैंकों ने मनमानी के तहत इस पेमेंट पर कुछ अपने नियम बना कर चार्ज लेना शुरू कर दिया। जैसे ही यह जानकारी सरकार की नजर में आई, तो सीबीडीटी ने बैंकों को यह चार्ज वापस करने का आदेश दिया है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड यानी सीबीडीटी ने साफ साफ कहा है कि 1 जनवरी 2020 से अब तक यूपीआई या अन्य डिजिटल पेमेंट पर जो भी शुल्क वसूला है, उसे वापस किया जाए।
कौन कौन से डिजिटल पेमेंट फ्री हैं
ये 4 प्रकार के पेमेंट हैं, जिन पर कोई शुल्क नहीं लगना है।
-रूपे डेबिट कार्ड
-यूनीफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई)
-यूपीआई क्विक रिस्पांस कोड (यूपीआई क्यूआर कोड)
-भीम यूपीआई क्यूआर कोड
सीबीडीटी ने कहा है कि पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट 2007 के तहत निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट पर 1 जनवरी 2020 से मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) सहित किसी भी तरह के शुल्क को लेने पर रोक लगा दी गई है। ऐसे में इन पेमेंट पर शुल्क लेना कानूनन गलत है।
सख्ता कार्रवाई का संदेश
सीबीडीटी ने अपने बयान में कहा कि पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट 2007 के सेक्शन 10ए के तहत कोई भी बैंक या सिस्टम प्रोवाइडर आईटी एक्ट के सेक्शन 269एसयू में निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक मोड से पेमेंट करने वाले या पेमेंट स्वीकार करने वाले से किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं वसूलेंगे। ऐसे में अगर शुल्क वसूला गया तो सीधे कार्रवाई होगी।
कई बैंक वसूल रहे हैं शुल्क
सीबीडीटी के अनुसार कुछ बैंक यूपीआई पेमेंट पर शुल्क ले रहे हैं। एक निश्चित संख्या तक ट्रांजेक्शन पर शुल्क नहीं लग रहा है, लेकिन उसके बाद हर यूपीआई पेमेंट पर कई बैंक शुल्क ले रहे हैं। सीबीडीटी ने अपने सर्कुलर में कहा कि बैंकों का यह कार्य पीएसएस एक्ट के सेक्शन 10ए और आईटी एक्ट के सेक्शन 269एसयू का उल्लंघन है। ऐसे में सख्त कार्रवाई हो सकती है।
इस एक्ट के तहत हो सकती है कार्रवाई
सीबीडीटी ने कहा है कि इन कानूनों के उल्लंघन पर आईटी एक्ट से सेक्शन 271डीबी और पीएसएस एक्ट के सेक्शन 26 के तहत कार्रवाई हो सकती है। सर्कुलर में बैंकों से कहा गया है कि वे 1 जनवरी 2020 को या उसके बाद सेक्शन 269एसयू के तहत निर्धारित डिजिटल मोड से किए गए ट्रांजेक्शन पर ग्राहकों से वसूले गए शुल्क को वापस कर दें। सर्कुलर में बैंकों को सचेत किया गया है कि भविष्य में वे इन डिजिटल मोड से किए जाने वाले पेमेंट पर कोई शुल्क नहीं लें।
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