नई दिल्ली, जुलाई 26। सोमवार को चुनाव आयोग की तरफ से घोषणा की गई है कि 1 अगस्त से वह पूरे महाराष्ट्र में वोटर आईडी को आधार कार्ड से जोड़ने का अभियान शुरू करेगा। चुनाव आयोग जो भारत में सभी चुनावी डेटा को तैयार करने का जिम्मेदार होता है। चुनाव अधिकारी (सीईओ), महाराष्ट्र ने बताया कि अब मतदाता पहचान पत्र को आधार कार्ड से जोड़ा जाएगा।
मतदाता की पहचान स्थापित हो सके
ताकि मतदाता की पहचान स्थापित हो सके और मतदाता सूची में प्रविष्टियों का प्रमाणीकरण किया जा सके साथ ही एक से अधिक निर्वाचन जगहों में व्यक्ति के पंजीकरण न हो पुष्टि किया जा सके।
लोकसभा में सांसदों के भारी आक्रोश के बीच विधेयक पारित
सीईओ ने कहा। (बीएमसी) सहित महाराष्ट्र में कई नगर निकायों में चुनाव होने हैं। मतदाताओं की पहचान स्थापित करने और मतदाता सूची में प्रविष्टियों के प्रमाणीकरण करने की एक मतदाता का नाम एक ही निवाचन क्षेत्र में है या नहीं या एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्र में है। अब मतदाता पहचान पत्र को आधार कार्ड से जोड़ा जाएगा महाराष्ट्र निर्वाचन सीईओ पिछले ईयर, भारत का पहचान पत्र मतलब आधार कार्ड को मतदाता पहचान पत्र के साथ जोड़ने का विधेयक लोकसभा में सांसदों के भारी आक्रोश के बीच पारित किया गया था। विधेयक को चुनाव कानून (संशोधन) विधेयक कहा जाता है और इसे केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा निचले सदन में पेश किए जाने के कुछ ही घंटों बाद ध्वनि मत से पारित किया गया था।
विपक्षी नेताओं का कहना इससे विसंगतियां पैदा होगी
संसद में इस विधेयक को आलोचना का सामना करना पड़ा और जिस कारण 12 सांसदों को निलंबित भी कर दिया गया। विधेयक में अपनी मर्जी से आधार कार्ड को वोटर आईडी से जोड़ने का जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की भाषा को लिंग तटस्थ बनाने का प्रस्ताव है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि आधार कार्ड से मतदाता सूची को जोड़ने से सामूहिक मताधिकार से वंचित हो जाएगा विपक्षी नेताओं का कहना है कि आधार कार्ड को वोटर आईडी से जोड़ने से अलग-अलग प्रकार की विसंगतियां पैदा हो जाएगी गैर निवासियों को भी मतदान प्रक्रिया में शामिल हो जाएंगे


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