नयी दिल्ली। वोडाफोन आइडिया को सुप्रीम कोर्ट से थोड़ी राहत मिली है। अदालत ने इनकम टैक्स बिभाग से कंपनी को 5 साल पुराने टैक्स मामले में 733 करोड़ रुपये लौटाने का निर्देश दिया है। बता दें कि वोडाफोन को आकलन वर्ष (Assessment Year) 2014-15 के लिए 733 करोड़ रुपये का टैक्स रिफंड मिलेगा। हालांकि उच्चतम न्यायालय ने कंपनी की उस मांग को खारिज कर दिया जिसमें आकलन वर्षों 2014-15, 2015-16, 2016-17 और 2017-18 के लिए बतौर टैक्स रिफंड 4,759.07 करोड़ रुपये की मांग की गई थी। जस्टिस उदय उमेश ललित और विनीत सरन की डिविजन बेंच ने टैक्स रिफंड पर 14 दिसंबर 2018 को दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर सुनवाई करते हुए आयकर विभाग को 4 हफ्तों के भीतर ये वोडाफोन को रिफंड देने का निर्देश दिया है।

अगस्त 2018 में की थी अपील
शुरुआत में वोडाफोन मोबाइल सर्विसेज ने याचिका दायर की थी, जो अगस्त 2018 में बाद आइडिया सेल्युलर के साथ मिल कर वोडाफोन आइडिया बन गई। याचिका में चार आकलन वर्षों के लिए रिफंड की मांग की गई थी। मगर कंपनी को सिर्फ एक साल का रिफंड मिलने का आदेश दिया गया है। बता दें कि 2014-15 के लिए भी वोडाफोन के 1,532 करोड़ के रिफंड क्लेम को जांच के बाद आधा कर दिया गया। वहीं आकलन वर्ष 2015-16 के लिए 1,355.51 करोड़ रु के रिफंड के दावे को विभाग ने अक्टूबर में खारिज कर दिया था। तब उलटे आयकर विभाग ने कंपनी से बतौर टैक्स 582 करोड़ रु की मांग की थी।
हजारों करोड़ रुपये का एजीआर है बकाया
सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले से वोडाफोन को थोड़ी राहत मिलेगी। मगर अभी भी कंपनी पर हजारों करोड़ रुपये का बकाया एजीआर है। हाल ही में वोडाफोन पीएलसी ने वोडाफोन आइडिया को राहत देते हुए 20 करोड़ डॉलर यानी करीब 1530 करोड़ रुपये का निवेश किया। वोडाफोन पीएलसी वोडाफोन की पैरेंट कंपनी है। कंपनी पर काफी कर्ज और सरकार को एजीआर चुकाने का दबाव है। ऐसे में इसके लिए ये निवेश काफी महत्वपूर्ण है जो कंपनी को कारोबार चलाए रखने में काम आएगा।


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