नयी दिल्ली। वोडाफोन आइडिया को 2019-20 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में 6453 करोड़ रुपये का जोरदार घाटा हुआ। इससे पिछली तिमाही में वोडाफोन आइडिया 50898 करोड़ रुपये के भारी भरकम घाटे में रही थी। ऊपर से अब पहले सुप्रीम कोर्ट और फिर सरकार के एक फैसले कंपनी की टेंशन लगातार बढ़ रही है। वोडाफोन को हजारों करोड़ रुपये के एजीआर यानी एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू का भुगतान करना है। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए 17 मार्च की नयी डेडलाइन रखी है। पहले ये डेडलाइन 23 जनवरी थी। सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए अब डेडलाइन आगे बढ़ा दी है। वहीं अब सरकार ने भी 23 जनवरी के उस आदेश को वापस ले लिया जिसमें उसने टेलीकॉम कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई न करने का फैसला किया था। सरकार ने एजीआर की बकाया राशि का भुगतान करने में नाकामयाब होने पर टेलीकॉम कंपिनयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई न करने का फैसला किया था। मगर अब सरकार ने ये फैसला वापस ले लिया है।
वोडाफोन की समस्या बढ़ रही
सुप्रीम कोर्ट और सरकार के रुख को देखते हुए एयरटेल ने कहा है कि वे 20 फरवरी तक दूरसंचार विभाग को बकाया एजीआर में से 10,000 करोड़ रुपये का भुगतान कर देगी। साथ ही इसने बची हुई राशि 17 मार्च से पहले जमा करने को कहा है। एयरटेल पर बकाया एजीआर 35,586 करोड़ रुपये का है। रिलयंस जियो पहले ही अपने 195 करोड़ रुपये के एजीआर का भुगतान कर चुकी है। बड़ी कंपनियों में रह गयी वोडाफोन आइडिया, जिस पर दबाव बढ़ रहा है। विश्लेषक कहते हैं कि वोडाफोन आइडिया के प्रमोटरों (यूके स्थित वोडाफोन ग्रुप और भारत का आदित्य बिड़ला ग्रुप) को कंपनी में फौरन नई पूंजी डालनी होगी, वरना घाटे में चल रही वोडाफोन आइडिया के पास दिवालिया होने के लिए आवेदन करने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं बचेगा।
नये इक्विटी निवेश की जरूरत
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी को उम्मीद है कि वोडाफोन अपना बकाया चुकाएगी। हालांकि विश्लेषकों को इसे लेकर संदेह है। इकोनॉमिक टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार रेटिंग एजेंसी फिच के डायरेक्टर नितिन सोनी का मानना है कि वोडाफोन आइडिया के बचे रहने की संभावना तब तक नहीं है, जब तक कि इसके प्रमोटर कंपनी में नयी इक्विटी पूँजी निवेश नहीं करते। सोनी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट की टेलीकॉ कंपनियों की संशोधित याचिका पर जोरदार प्रतिक्रिया व्यक्त करने का मतलब है कि एजीआर के भुगतान के मामले में इन्हें (सरकार से) किसी भी राहत की संभावना लगभग शून्य है।
53000 करोड़ रुपये से अधिक बकाया
वोडाफोन आइडिया पर 53000 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया एजीआर है। कंपनी को अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में लगातार छठी तिमाही में घाटा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के एक वरिष्ठ वकील ने कहा कि वोडाफोन आइडिया एनसीएलटी (National Company Law Tribunal) को अप्रोच कर सकता है और अगर उसने इस मामले को स्वीकार कर लिया, तो दिवालियापन कानून के तहत भुगतान पर रोक लग जाएगी और वोडाफोन आइडियो को भुगतान नहीं करना पड़ सकता है। यानी अब या तो कंपनी के प्रमोटर इसमें नयी पूँजी का निवेश करें या फिर कंपनी दिवालिया होने के लिए आवेदन करे। यही दो रास्ते जानकारों के मुताबिक वोडाफोन के पास हैं।
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