नयी दिल्ली। इस समय वोडाफोन आइडिया और एयरटेल की वित्तीय स्थिति काफी खराब है। दोनों कंपनियों ने अपने मोबाइल चार्जेस बढ़ा दिये हैं, मगर बावजूद इसके दोनों ही कंपनियों पर एजीआर यानी एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू चुकाने का भारी वित्तीय दबाव है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दूरसंचार विभाग ने टेलीकॉम और कुछ नॉन-टेलीकॉम कंपनियों से समय एजीआर चुकाने को कहा है। इसी के लिए प्रोविजन बनाने की वजह से जुलाई-सितंबर तिमाही में एयरटेल और वोडाफोन आइडिया को भारी घाटा हुआ। एयरटेल और वोडाफोन के पास इसे चुकाने के लिए कोई एक्शन प्लान नहीं है। वोडाफोन ने तो कोई राहत न मिलने पर भारत में अपना कारोबार ही बंद करने के संकेत दिये हैं। अब एजीआर का दबाव सिर्फ कंपनियों की बैलेंस शीट तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इनके कर्मचारियों को भी प्रभावित कर रहा है। इकोनॉमिक्स टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक भविष्य को लेकर बढ़ती अनिश्चितता को देखते हुए एयरटेल और वोडाफोन के कर्मचारी चिंतित हैं कि उनकी नौकरी सुरक्षित रहेगी या नहीं।
तलाश रहे हैं दूसरी नौकरी
एयरटेल और वोडाफोन के कई सेल्स मैनेजर सहित अन्य बहुत से कर्मचारी हायरिंग फर्मों से संपर्क करके दूसरे विकल्प तलाश रहे हैं। इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार एक ऐसे ही सेल्स मैनेजर वेतन में 10-12 फीसदी की बढ़ोतरी पर एक नयी नौकरी जॉइन करने के लिए तैयार हैं, जबकि उन्हें अपनी मौजूदा कंपनी में 30 फीसदी वेतन बढ़ोतरी का वादा किया जा रहा है। एय़रटेल के करीब 5000 और वोडाफोन के करीब 7000 कर्मियों की प्रोफाइल इस समय बाजार में घूम रही है। वोडाफोन के करीब 70 फीसदी और एयरटेल के करीब 30 फीसदी कर्मचारी नयी नौकरी की तलाश कर रहे हैं।
सरकार चाहती है तीनों कंपिनयाँ बरकरार रहें
दूसरी तरफ सरकार चाहती है कि टेलीकॉम सेक्टर में प्राइवेट क्षेत्र की अंतिम तीन बाकी कंपनियाँ कारोबार करती रहें। मगर वोडाफोन आइडिया के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने पहले ही भारतीय दूरसंचार उद्योग की स्थिति को लेकर कहा कि वोडाफोन आइडिया को सरकार से 53,000 करोड़ रुपये के एजीआर के बकाया का भुगतान करने में कोई राहत नहीं मिली, तो कारोबार ही बंद करना पड़ सकता है। 2016 में जियो के आने के बाद एयरटेल और वोडाफोन आइडिया के लिए चुनौतियाँ बड़ी हैं। इसी चुनौति को देखते हुए वोडाफोन और आइडिया ने आपस में विलय कर लिया।
बरकरार रहेगी जियो की बादशाहत
वहीं सेंट्रम इंस्टीट्यूशनल रिसर्च ने कहा है कि डेटा स्पीड और 4जी नेटवर्क कवरेज एरिया के लिहाज से मोबाइल चार्जेस में बढ़ोतरी के बावजूद बाजार हिस्सेदारी में बढ़ोतरी और डेटा उपयोग के मामले में जियो की बादशाहत अगले 18-24 महीनों तक आराम से बनी रहेगी। पर इसके नये कस्टमर जोड़ने की स्पीड कम हो सकती है। सेंट्रम ने वित्त वर्ष 2021-22 में जियो के हर महीने 55-65 लाख उभोक्ता जोड़ने का अनुमान लगाया है, जबकि इसकी मौजूदा रफ्तार हर महीने 80-85 लाख उपभोक्ता जोड़ने की है। वहीं 2018-19 में जियो ने हर महीने करीब औसतन 1 करोड़ उपभोक्ता जोड़े थे।
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