बिजनेस मॉडल और प्रोजेक्ट्स Vikran Engineering कहां-कहां करती है काम? जानें पूरी प्रोफाइल

Vikran Engineering IPO: इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन से जुड़ी कंपनी विक्रान इंजीनियरिंग लिमिटेड का आईपीओ 26 अगस्त 2025 से निवेशकों के लिए ओपन हो चुका है। कंपनी इस इश्यू के जरिए 721 करोड़ रुपए के नए शेयर्स जारी करेगी और साथ ही 51 करोड़ रुपए तक ऑफर फॉर सेल (OFS) भी लाएगी। इस इश्यू के पूरा होने के बाद कंपनी के प्रमोटर्स की हिस्सेदारी घटकर 81.8% से 56.2% रह जाएगी।

Vikran Engineering IPO

बिजनेस स्ट्रक्चर

विक्रान इंजीनियरिंग का बिजनेस मॉडल बाकी कई कंपनियों की तुलना में बेहतर मार्जिन पर चलता है। कंपनी की 80% से ज्यादा आमदनी सरकारी प्रोजेक्ट्स से आती है। हालांकि, इसका कामकाज ज्यादा तरल पूंजी (वर्किंग कैपिटल) पर निर्भर है और ब्याज भुगतान का बोझ भी कंपनी की कमाई का बड़ा हिस्सा खा जाता है।

प्रोजेक्ट पोर्टफोलियो

2011 में स्थापित इस कंपनी का फोकस जल आपूर्ति से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर है। इसमें अंडरग्राउंड वॉटर डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम, ओवरहेड टैंक, सतही जल निकासी और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क जैसी योजनाएं शामिल हैं।

30 जून 2025 तक कंपनी के पास 16 राज्यों में 44 सक्रिय प्रोजेक्ट्स थे। इन प्रोजेक्ट्स का कुल मूल्य 5120.2 करोड़ रुपए था, जिसमें से 2442.4 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स अभी अधूरे हैं।

बिडिंग में कमी

कंपनी को नए कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने में अब मुश्किलें आने लगी हैं। FY23 में इसका बिड सक्सेस रेट 42% था, जो FY25 में घटकर 20% पर आ गया। इसका मतलब है कि कंपनी अब पहले की तरह आसानी से प्रोजेक्ट नहीं जीत पा रही।

वित्तीय ग्रोथ

बीते कुछ सालों में कंपनी की आमदनी और मुनाफा दोनों में तेजी रही है।

FY23 से FY25 तक ऑपरेशनल आय 32.2% CAGR की दर से बढ़कर 915.8 करोड़ रुपए हो गई।

इसी अवधि में शुद्ध लाभ 34.8% CAGR की दर से बढ़कर 77.8 करोड़ रुपए पहुंचा।

कंपनी का EBITDA मार्जिन FY23 में 15.2% से बढ़कर FY25 में 17.5% हो गया, जो इंडस्ट्री में बाकी कंपनियों से काफी बेहतर है।

लेकिन, इसकी एक बड़ी कमजोरी यह है कि कुल रेवेन्यू का लगभग चौथाई हिस्सा सिर्फ एक ग्राहक से आता है। यह क्लाइंट पर निर्भरता निवेशकों के लिए रिस्क बढ़ा सकती है।

कैश फ्लो की दिक्कत

कंपनी के ऑपरेटिंग कैश फ्लो पर दबाव बना हुआ है। FY24 में कंपनी को 66.5 करोड़ रुपए का घाटा हुआ और FY25 में यह बढ़कर 129.1 करोड़ रुपए तक पहुंच गया।

ट्रेड रिसीवेबल डेज (ग्राहकों से पेमेंट वसूलने का औसत समय) FY23 में 221 दिन था, जो FY25 में घटकर 190 दिन रह गया है। कंपनी का टारगेट FY27 तक इसे 170 दिन तक लाने का है।

वैल्यूएशन और इंडस्ट्री कंपटीशन

IPO की कीमत को देखें तो कंपनी का P/E रेशियो करीब 32 बनता है। इसके कॉम्प्टीशन जैसे ट्रांस रेल लाइटिंग, एसपीएमएल इंफ्रा और टेक्नो इलेक्ट्रिक एंड इंजीनियरिंग का P/E रेशियो 31 से 40 के बीच है।

जहां एक ओर कंपनी के मार्जिन और सरकारी प्रोजेक्ट्स में पकड़ मजबूत है, वहीं दूसरी ओर वर्किंग कैपिटल की जरूरत बिडिंग रेट में गिरावट, क्लाइंट कंसंट्रेशन और कमजोर कैश फ्लो जैसी चुनौतियां निवेशकों को सोचने पर मजबूर कर सकती हैं।

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