Vijayadashami 2025; Dussehra: नवरात्रि के महा उत्सव का अब अंतिम पडाव आ चुका है और इसके साथ दशहरा यानी विजयादशमी के उत्सव की तैयारी की जा रही है। देशभर में मनाया जाने वाले इस उत्सव को लेकर कई लोगों के मन में संशय है कि विजयदशमी जिसे दशहरा भी कहा जाता है, कब मनाया जाएगा। दशहरा 1 अक्टूबर को मनाया जाएगा या 2 अक्टूबर को...तो चलिए जान लेते हैं...

विजयदशमी यानी दशहरा को महापर्व पूरे देश में गुरुवार, 2 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा। यह दिन भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और माता दुर्गा की महिषासुर पर विजय का प्रतीक है। यह अच्छाई की बुराई पर जीत का संदेश देता है।
देशभर में इस महापर्व को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस विशेष मौके पर उत्तर भारत में हजारों जगहों पर रामलीला का आयोजन किया जाता है और लोग रावण के पुतले जलाकर बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाते हैं। दशहरा का यह महा उत्सव न सिर्फ भारत बल्कि पड़ोसी देश नेपाल में भी मनाया जाता है। नेपाल में इसे दशैं कहा जाता है और यह सबसे बड़ा राष्ट्रीय पर्व माना जाता है।
विजयादशमी की तिथि और समय
तारीख: गुरुवार, 2 अक्टूबर 2025
दशमी तिथि प्रारंभ: 1 अक्टूबर 2025 को शाम 7:01 बजे
दशमी तिथि समाप्त: 2 अक्टूबर 2025 को शाम 7:10 बजे
विजय मुहूर्त: दोपहर 2:09 से 2:57 तक (कुल 48 मिनट)
अपराह्न पूजा का समय (पश्चिम बंगाल): दोपहर 1:21 से 3:45 तक (कुल 2 घंटे 24 मिनट)
श्रवण नक्षत्र: प्रारंभ 2 अक्टूबर सुबह 9:13 से समाप्त 3 अक्टूबर सुबह 9:34 तक
सनातन परंपरा में विजयादशमी का क्या है महत्व?
सनातन परंपरा में विजयादशमी केवल धार्मिक पर्व नहीं है बल्कि यह सांस्कृतिक उत्सव भी है, जो यह सिखाता है कि सत्य और धर्म की सदैव विजय होती है। विजयदशमी का यह त्योहार पूरे भारत के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग ढंग से मनाया जाता है। उत्तर भारत में रामलीला और रावण दहन, बंगाल में दुर्गा विसर्जन और मैसूर में दशहरा उत्सव मनाया जाता है।
दशहरा या विजयादशमी के दिन देवी शक्ति की पूजा की जाती है, क्योंकि यह त्यौहार नवरात्रि के नौ दिनों के बाद दसवें दिन पड़ता है, जिसमें देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है। इस दिन शस्त्रों की भी पूजा की जाती है, क्योंकि भगवान राम ने रावण पर विजय प्राप्त करने से पहले अपने शस्त्रों की पूजा की थी।
वहीं देवी दुर्गा ने भी महिषासुर का वध करने से पहले इसी दिन अपने शस्त्रों की पूजा की थी। इसलिए, यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और शक्ति और सुरक्षा का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मनाया जाता है।
विजयादशमी और दशहरा में अंतर
दशहरा और विजयादशमी एक ही दिन मनाए जाने वाले दो त्योहार हैं, और प्रत्येक का अपना पौराणिक महत्व है। दशहरा भगवान राम की रावण पर विजय से जुड़ा है, जबकि विजयादशमी देवी दुर्गा की महिषासुर पर विजय का प्रतीक है।
दशहरे पर भगवान राम ने रावण का वध किया था, जबकि विजयादशमी पर देवी दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था। इस प्रकार, दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, और विजयादशमी, जिसका अर्थ है 'विजय का दसवां दिन', देवी दुर्गा की महिषासुर पर विजय के रूप में मनाई जाती है।


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