नई दिल्ली, सितंबर 17। दिग्गज कंपनी वेदांत एक बार फिर से अपने शेयरधारकों पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान है। ये अपने शेयरधारकों पर एक बार फिर से पैसा बरसाने जा रही है। तेल से धातु तक वाला यह समूह वेदांत लिमिटेड अपने शेयरधारकों को स्पेशल डिविडेंड देगा। डिविडेंड के रूप में 12,500 करोड़ रुपये शेयरधारकों में बांटे जाएंगे। बता दें कि हाल ही में वेदांत ने अपने शेयरधारकों को डिविडेंड दिया था। अब फिर से ये शेयरधारकों को स्पेशल डिविडेंड देगी।
11 अक्टूबर है अहम डेट
वेदांत 11 अक्टूबर 2022 को अपनी बोर्ड बैठक में इस पैसे (डिविडेंड) के वितरण के लिए मंजूरी मांगेगी। अनिल अग्रवाल की अगुवाई वाली वेदांता लिमिटेड का मानना है कि जनरल रिजर्व के रूप में मौजूद फंड निकट भविष्य में कंपनी की प्रत्याशित ऑपरेशनल और व्यावसायिक जरूरतों से अधिक है। 12,500 करोड़ रुपये का विशेष लाभांश 33 से 35 रुपये प्रति शेयर होने की संभावना है।
शेयरधारकों की बल्ले-बल्ले
कंपनी ने एक एक्सचेंज फाइलिंग में कहा है कि इस अतिरिक्त फंड का उपयोग आगे शेयरधारकों की वैल्यू क्रिएट करने के लिए किया जा सकता है। कुल मिला कर कंपनी के इस कदम से इसके शेयरधारकों को काफी फायदा होगा।
वेदांत की नयी डील
वेदांता ने हाल ही में घोषणा की थी कि वह फॉक्सकॉन ग्रुप के साथ मिलकर गुजरात में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम स्थापित करने के लिए 1.54 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करेगी। कंपनी ने कहा कि वह राज्य के लिए लगभग 1 लाख का रोजगार पैदा करेगी। कंपनी ने कहा था सेल्स वॉल्यूम में स्थिर वृद्धि, निरंतर संचालन के लिए संतुलित पूंजीगत व्यय ने कंपनी को कैश फ्लो जनरेट करने का एक मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड हासिल करने में मदद की है।
कितनी है मार्कैट कैपटिल
शुक्रवार को वेदांत का शेयर बीएसई पर 7.5 फीसदी गिर कर 290.60 रु पर बंद हुआ। इसकी मार्केट कैपटिल 1.08 लाख करोड़ रु है। इसके पिछले 52 हफ्तों का शिखर 440.75 रु और निचला स्तर 206.10 रु रहा है। बीते 5 दिन में यह 8.25 फीसदी और 1 महीने में 9.13 फीसदी रिटर्न दे चुका है। 2022 में अब तक यह 17.82 फीसदी फिसला है। 1 साल का इसका रिटर्न निगेटिव 3.70 फीसदी रहा है।
क्या है कंपनी का बिजनेस
वेदांत लिमिटेड एक भारतीय बहुराष्ट्रीय खनन कंपनी है जिसका मुख्यालय मुंबई, भारत में है, जिसका मुख्य परिचालन गोवा, कर्नाटक, राजस्थान और ओडिशा में लौह अयस्क, सोना और एल्यूमीनियम खानों में है। वेदांत को पहले स्टरलाइट इंडस्ट्रीज कहा जाता था। इसकी शुरुआत 1980 के दशक में हुई। इसे इसके संस्थापक डी.पी. अग्रवाल ने मुंबई में स्टरलाइट इंडस्ट्रीज (इंडिया) लिमिटेड के तौर पर शुरू किया था। फिर भारत के विभिन्न राज्यों में खनन रियायतें खरीदना शुरू किया। जल्द ही उनके दो बेटों, नवीन अग्रवाल और सुनील अग्रवाल से जुड़ गए, जो दोनों वर्तमान में कंपनी चलाते हैं। डीपी अग्रवाल का पटना में एल्युमीनियम कंडक्टर का छोटा सा कारोबार था। उनके बेटे अनिल अग्रवाल अपने कारोबार का विस्तार करने के लिए मुंबई आए थे। 1990 के दशक में, जैसे ही भारत सरकार ने बीमार (निष्पादित) कंपनियों को बेचना शुरू किया, स्टरलाइट ने उनके लिए बोली लगाना शुरू कर दिया। ये बाल्को और हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के लिए सफलतापूर्वक बोली लगाने में सक्षम रही थी।
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