Vande Cargo News: भारतीय रेलवे ने वंदे भारत ट्रेन से कई लोगों को आरामदायक ट्रेन सुविधा दी है। अब वंदे भारत ट्रेन, वंदे मेट्रो के बाद Vande Cargo भी जल्द पटरियों पर दौड़ने वाली है। इस ट्रेन को खास तरह से डिजाइन किया गया है। ये ट्रेन हाई स्पीड पर दौड़ेगी और इसका लुक वंदे भारत ट्रेन जैसा ही है। आइए इसके बारे में आपको सारी जानकारी देते हैं।

ऐसी दिखती है Vande Cargo (Vande Cargo First Look)
ये वंदे कार्गो ट्रेन बिल्कुल वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन की तरह ही दिखेगी। इस वंदे कार्गो ट्रेन में यात्रियों के लिए सीट नहीं होगी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस साल के अंत तक वंदे कार्गो ट्रेन बनकर पूरी तरह से तैयार हो जाएगी।
वंदे कार्गो से ये काम हो जाएगा आसान (vande cargo news in hindi)
रेलवे अपने सर्विस को बेहतर और आधुनिक बनाने पर फोकस कर रही है। ये वंदे कार्गो ट्रेन से एक शहर से दूसरे शहर आसानी से कम समय में सुरक्षित माल ढुलाई किया जाएगा। फिलहाल ICF कोच फैक्ट्री में वंदे कार्गो ट्रेन को बनाने का काम किया जा रहा है।
यहां डिजाइन की जा रही है वंदे भारत कार्गो
चेन्नई स्थित रेल कोच फैक्ट्री (ICF) में वंदे कार्गों ट्रेन का निर्माण किया जा रहा है। जिस प्लेटफॉर्म पर वंदे भारत और वंदे मेट्रो ट्रेनों के कोच का निर्माण किया गया है, वहीं हाई स्पीड वंदे कार्गो बनेगी। रेलवे के अनुसार, कम दूरी वाले शहरों के बीच वंदे कार्गो ट्रेन को चलाने की तैयारी की जा रही है।
इतनी वंदे भारत ट्रेनों का प्रधानमंत्री ने किया सितंबर में शुभारंभ
पीएम मोदी ने सितंबर माह में ही 6 वंदे भारत ट्रेनों को भी दिखाएंगे हरी झंडी हैं। ये ट्रेनें टाटानगर से पटना, भागलपुर, दुमका से हावड़ा, ब्रह्मपुर से टाटानगर, गया से हावड़ा, देवघर से वाराणसी और राउरकेला से हावड़ा के बीच चलेगी। इसके अलावा पीएम मोदी ने हाल ही में अहमदाबाद में 8,000 करोड़ रुपये से अधिक की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। पीएम मोदी अहमदाबाद-गांधीनगर मेट्रो रेल सेवा के दूसरे चरण की भी शुरुआत जल्द करेंगे।
वंदे भारत स्लीपर भी जल्द होगी शुरू
सरकार देश में वंदे भारत स्लीपर ट्रेन चलाने की भी तैयारी में जुटी हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में पहले की तुलना में आरामदायक बर्ध, साफ और आधुनिक शौचालय, हाई स्पीड वाई-फाई, हर सीट पर यात्रियों को पढ़ने के लिए अलग से लाइट और मोबाइल चार्जिंग की सुविधाओं से लैस होगी।
वंदे भारत स्लीपर के अनावरण के दौरान बताया गया यह ट्रेन 160kmph की रफ्तार से चल सकती है। पांच साल पहले मुंबई से दिल्ली के बीच 160 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से ट्रेन चलाने के लिए 'मिशन रफ्तार' परियोजना की शुरुआत हुई थी।
ट्रेनों की स्पीड के साथ उनकी सेफ्टी को बढ़ाने के लिए पूरे रूट पर भारतीय रेलवे की 'कवच' तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। जिन ट्रेन में कवच लगा हो, उनका आमने-सामने से टकराना असंभव है, क्योंकि टकराने से पहले ट्रेन में ऑटोमैटिक ब्रेक लग जाएंगे। भारतीय रेलवे में फिलहाल ट्रेनों की औसत गति 70 से 80 किमी प्रति घंटा है, जिसे रेलवे 160 किमी प्रति घंटा करना चाहती है।
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