Vande Bharat Sleeper Train: वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का लोग लंबे समय से समय से इंताजर कर रहे हैं लेकिन ये इंतजार जल्दी ही खत्म होने वाला है। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन जल्द ही पटरियों पर दौड़ना शुरू करेगी। इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) और BEML निर्मित वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस ट्रेन सेट के प्रोटोटाइप का 23 अक्टूबर को ICF में अनावरण किया गया। करीब 15 दिन पहले, पहला सेट ICF के पास आया था, जो शुरुआती टेस्टिंग कर रहा है। ICF के महाप्रबंधक यू सुब्बा राव ने कहा कि 15 नवंबर तक ट्रेन परीक्षण के लिए तैयार हो जाएगी।

180 किलो मीटर की रफ्तार से दौड़ेगी ट्रेन
ICF के महाप्रबंधक यू सुब्बा राव ने बताया है कि एक ट्रेन को बनाने पर 120 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। ट्रेन का 90 किमी प्रति घंटे से लेकर 180 किमी प्रति घंटे की स्पीड से दो महीने तक टेस्ट किया जाएगा। इस ट्रेन में इमर्जेंसी ब्रेक सिस्टम लगाया गया है और कई सारी नई तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इन सभी तकनीक का परीक्षण किया जाएगा। 15 नवंबर तक टेस्टिंग का काम पूरा होने की उम्मीद है। यह टेस्टिंग लखनऊ आरडीएसओ और पश्चिमी रेलवे में की जाएगी। उम्मीद है कि 15 जनवरी तक इसके सार्वजनिक इस्तेमाल की मंजूरी दे दी जाएगी।
ट्रेन में मिलेंगी ये सभी सुविधाएं
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में टच-फ्री बायो-वैक्यूम टॉयलेट और टॉक-बैक यूनिट लगाई गई हैं। इसके अलावा फर्स्ट क्लास कूपों में अपर बर्थ तक आसानी से पहुंचने के लिए सीढ़ियां और फ्लाइट-स्टाइल अटेंडेंट बटन होंगे। इतना ही नहीं, ट्रेन हादसों से बचाने के लिए कवच सिस्टम और एंटी-क्लाइम्बिंग टेक्नोलॉजी को भी लगाया गया है।
जल्द बनेंगी 50 नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन
बीईएमएल दस ट्रेनें बनाएगी, जिनमें से एक 16 डिब्बों वाली रेलगाड़ी होगी। आईसीएफ को 24 डिब्बों वाली 50 ट्रेनें बनाने का ऑर्डर मिला है, जो चेन्नई में बनाई जाएंगी। उन्होंने कहा कि प्रणोदन प्रणाली के लिए टेंडर पहले ही जारी की जा चुकी हैं। उन्होंने कहा, "हमें 24 महीने का समय मिला है, लेकिन टेंडर अंतिम रूप दिए जाने के बाद हम इसे 18 महीने में बना सकते हैं।" इसके अलावा माल ढुलाई के लिए वंदे भारत का एक प्रोटोटाइप आईसीएफ में तैयार किया जाएगा, ताकि समय पर डिलीवरी की आवश्यकता वाले ई-कॉमर्स उत्पादों के परिवहन में मदद मिल सके। उन्होंने कहा कि बाजार की मांग के आधार पर और अधिक उत्पादन किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रोटोटाइप इस वित्तीय वर्ष में तैयार हो जाएगा।
वहीं, हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन के बारे में राव ने कहा कि आईसीएफ में एक प्रोटोटाइप का निर्माण किया जा रहा है। इसे आईसीएफ और दक्षिणी रेलवे के सहयोग से मेधा द्वारा निर्मित किया जा रहा है।


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