नई दिल्ली, सितंबर 12। रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी की रिलायंस कैपिटल के शेयरधारकों के लिए बहुत बुरी खबर है। इस कंपनी के शेयरों की वैल्यू जीरो हो गई है। अनिल अंबानी वाले रिलायंस समूह की इस कंपनी के शेयरों में कारोबार भी रोक दिया गया है। गौरतलब है कि डीमैट से सभी शेयर डेबिट हो चुके हैं। कंपनी में पब्लिक शेयर होल्डिंग 94 फीसदी से ज्यादा है, यानी 94 फीसदी से अधिक शेयर रिटेल निवेशकों के पास हैं। तो जाहिर है कि सर्वाधिक घाटा भी उन्हीं को हुआ होगा। आगे जानिए ऐसा क्यों हुआ।
भारतीय रिजर्व बैंक की कार्रवाई
रिलायंस कैपिटल को दिवालिया घोषित कराने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने एनसीएलटी का रुख किया था। फाइनेंशियल सर्विसेज देने वाली रिलायंस कैपिटल मिडकैप 50 इंडेक्स में थी। लाइफ, जनरल और हेल्थ इंश्योरेंस में सेवाएं देने के अलावा रिलायंस कैपिटल कमर्शियल, होम फाइनेंस, इक्विटी और कमोडिटी ब्रोकिंग जैसे सेगमेंट में भी सेवाएं देती रही है।
कर्ज के जाल में फंसी रिलायंस कैपिटल
अब रिलायंस कैपिटल के शेयरों की वैल्यू जीरो हो गयी है, जिससे इसके निवेशकों के लिए असमंजस की स्थिति बन गयी है। रिलांयस कैपिटल की मौजूदा हालत इसके कर्ज में फंसने के कारण हुई है। कर्जदाताओं की एक समिति कंपनी के रेजॉल्यूशन प्रोसेस की समीक्षा भी कर चुकी है। कंपनी के लिए बि़ड प्रोसेस 29 अगस्त को पूरी हो गयी। जिन संस्थानों ने इसे खरीदने में दिलचस्पी दिखाई उनमें इंडसइंड बैंक, ओकट्री कैपिटल (अमेरिका) और टॉरेंट ग्रुप शामिल हैं।
रिलायंस नेवल एंड इंजीनियरिंग पर भी मुसीबत
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रिलायंस कैपिटल के अलावा अनिल अंबानी ग्रुप की एक और कंपनी रिलायंस नेवल एंड इंजीनियरिंग के शेयरों में लेन-देन को रोका गया है। असल में रिलायंस नेवल के लिए भी दिवालिया प्रक्रिया चल रही है। एक्सचेंजों ने कंपनी के शेयरों को एडिशनल सर्विलांस मेजर (एएसएम) में रखा है। एएसएम में आने का मतलब है कि सप्ताह में केवल एक बार इन शेयरों में ट्रेडिंग की अनुमति होगी।
दिवालिया प्रक्रिया के बारे में
अगर कोई कंपनी अपना कर्ज न लौटा पाए तो कर्ज देने वाले इंसॉल्वेंसी रेजॉल्यूशन प्रोसेस शुरू करा सकते हैं। ये उनका अधिकार होता है। इस अधिकार के जरिए कर्ज की रकम की प्राप्ति करना है। कर्जदार इसके लिए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल या एनसीएलटी के पास जा सकते हैं। फिर 6 महीने के लिए कंपनी की सारी संपत्ति फ्रीज हो जाती है। इन 6 महीनों में एनसीएलटी कंपनी को रिवाइव करने सहित अन्य समाधानों पर विचार करती है।
आरबीआई के पास है कमान
नवंबर 2021 में आरबीआई ने रिलायंस कैपिटल के बोर्ड को भंग करके इसका मैनेजमेंट खुद संभाल लिया था। इसके बाद कंपनी के खिलाफ दिवालिया प्रोसेस शुरू करने के लिए इसने एनसीएलटी का रुख किया था। एक अन्य खबर में अनिल अंबानी ग्रुप की रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ने अडानी ग्रुप की अडानी ट्रांसमिशन लिमिटेड के खिलाफ एक शिकायत दायर की है। रिलायंस इंफ्रा के मुताबिक कंपनी ने अडानी ट्रांसमिशन के खिलाफ इसके मुंबई बिजली-वितरण व्यवसाय को बेचने के सौदे के संबंध में 134 अरब रुपये (1.7 अरब डॉलर) के सेटलमेंट के लिए मध्यस्थता दावा दायर किया है।
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