US Tariff: देश की बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज का कहना है कि भले ही इलेक्ट्रिक गाड़ियों का चलन बढ़ रहा हो, लेकिन आने वाले समय में कच्चे तेल की मांग में कमी नहीं आएगी। कंपनी का मानना है कि टैरिफ बढ़ने और वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ने से सप्लाई चेन में बाधाएं आ सकती हैं। इससे व्यापार में उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता दोनों देखने को मिल सकते हैं।

2025 में कारोबारी माहौल रहेगा चुनौतीपूर्ण
रिलायंस ने अपने ताजा बयान में कहा है कि चीन में मांग की कमी, एशियाई देशों में एविएशन सेक्टर की धीमी चाल और बदलते अंतरराष्ट्रीय नियम 2025 में बिजनेस के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकते हैं। इसके अलावा अलग-अलग देशों के नए व्यापारिक प्रतिबंध भी कंपनियों के मुनाफे पर असर डाल सकते हैं।
अमेरिका ने भारत पर बढ़ाया टैक्स क्यों लिया यह फैसला?
हाल ही में अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले कई प्रोडक्ट्स पर 25% अतिरिक्त टैक्स लगाने का फैसला लिया है। इससे इन प्रोडक्ट्स पर कुल टैक्स करीब 50% तक पहुंच गया है। इस फैसले के पीछे अमेरिका की नाराजगी की वजह भारत का रूस से लगातार सस्ता तेल खरीदना बताया जा रहा है।
किन-किन चीजों पर पड़ेगा असर?
अमेरिका के इस कदम से भारत के कई प्रमुख निर्यात उद्योगों को नुकसान हो सकता है। खासकर ये सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं:
रेडीमेड कपड़े और टेक्सटाइल
जेम्स एंड ज्वैलरी
समुद्री उत्पाद, खासकर झींगा
चमड़ा और जूते
एनिमल प्रोडक्ट्स
केमिकल और मशीन उपकरण
इन क्षेत्रों में काम करने वाली अधिकतर यूनिट्स MSME सेक्टर से जुड़ी हैं। ऐसे में छोटे उद्योगों को सबसे ज्यादा असर झेलना पड़ सकता है।
भारत को कितना झटका लग सकता है?
बीते फाइनेंस ईयर में भारत ने अमेरिका को करीब 86 अरब डॉलर का माल निर्यात किया था। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की नई नीति से लगभग 60% निर्यात पर सीधा असर पड़ेगा। इससे भारत के व्यापार घाटे में बढ़ोतरी हो सकती है और विदेशी मुद्रा भंडार पर भी दबाव आ सकता है।
अब सबकी निगाहें व्यापारिक वार्ता पर
भारत और अमेरिका के बीच इस महीने के अंत में व्यापार पर अहम बातचीत होने वाली है। माना जा रहा है कि इसी मीटिंग में टैक्स और टैरिफ के इस विवाद पर चर्चा हो सकती है। उद्योग जगत को उम्मीद है कि बातचीत के जरिए समाधान निकलेगा, जिससे व्यापार सामान्य हो सके।
बढ़ते टैरिफ और वैश्विक तनाव बन रहे चुनौती
एक तरफ दुनिया पर्यावरण के लिए क्लीन एनर्जी की ओर बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक फैसले और व्यापारिक टकराव देशों की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाल रहे हैं। भारत को अब कूटनीतिक समझदारी से अपने हितों की रक्षा करनी होगी।
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