India-USA BTA: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी पहुंचे थे, जहां उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात जिसके बाद इन तीन देशों के बीच सहयोग के अच्छे संकेत दिये हैं। इन मुलाकातों ने वैश्विक स्तर पर नए समीकरणों की संभावना को जन्म दिया है और इसी के साथ भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्तों में भी नई हलचल देखी जा रही है। भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement - BTA) को लेकर चर्चाएं एक बार फिर सुर्खियों में हैं।

वाणिज्य मंत्री का बयान
मंगलवार को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि भारत और अमेरिका के बीच बीटीए पर बातचीत चल रही है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच वार्ता का सिलसिला आगे बढ़ रहा है और उम्मीद है कि आने वाले समय में इस पर ठोस नतीजे सामने आ सकते हैं। गोयल ने यह भी कहा कि भारत और चीन के रिश्ते भी धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं।
पांच दौर की बातचीत पूरी, अगली तारीख तय नहीं
भारत और अमेरिका के बीच इस साल मार्च से बीटीए पर बातचीत शुरू हुई थी। अब तक पांच दौर पूरे हो चुके हैं। हालांकि, छठे दौर की बैठक की तारीख तय नहीं हो पाई है। दरअसल, अमेरिका ने 27 अगस्त से भारत पर 25% टैरिफ लगा दिया है और रूस से तेल आयात पर भी 25% का अतिरिक्त शुल्क लागू किया है। इसी वजह से अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने अगस्त के अंत में होने वाली भारत यात्रा टाल दी थी।
अमेरिका के लिए क्यों अहम है भारत
पिछले दो दशकों में भारत-अमेरिका संबंध कई उतार-चढ़ाव से गुजरे हैं। मौजूदा समय में देखें तो स्थिति और नाजुक हो गई है क्योंकि भारत रूस और चीन के साथ सहयोग बढ़ा रहा है। अगर यह तीनों देश साथ आते हैं तो यह अमेरिका के इंडो-पैसिफिक रणनीतिक हितों को चुनौती दे सकता है। यही कारण है कि अमेरिका लगातार भारत को अपने नजदीक रखने की कोशिश कर रहा है।
ट्रंप प्रशासन की चिंता
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शीर्ष सलाहकार पीटर नवारो ने पीएम मोदी की पुतिन और शी जिनपिंग से मुलाकात को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मोदी जैसे बड़े लोकतांत्रिक देश के नेता का रूस और चीन के साथ दिखना अमेरिका के लिए चिंताजनक है। नवारो ने यहां तक कहा कि भारत को रूस से तेल खरीदना बंद करना चाहिए और यूक्रेन व यूरोप का समर्थन करना चाहिए। उनके अनुसार, भारत शांति प्रक्रिया में अहम भूमिका निभा सकता है।
आगे क्या?
भारत इस समय वैश्विक कूटनीति में एक संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है। एक तरफ वह रूस और चीन के साथ अपने संबंध मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका से भी सहयोग बनाए रखना चाहता है। बीटीए पर होने वाली बातचीत आने वाले महीनों में निर्णायक साबित हो सकती है। अगर यह समझौता होता है तो यह भारत और अमेरिका दोनों के लिए व्यापार और निवेश के नए दरवाजे खोल सकता है।


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