US-India Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच कारोबारी रिश्ते एक बार फिर चर्चा में हैं। माना जा रहा है आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच बड़ी डील की संभावना जताई जा रही है। अमेरिकी अधिकारी सोमवार रात भारत पहुंच रहे हैं और मंगलवार को व्यापारिक वार्ता होने वाली है। हालांकि, यह बैठक ऐसे समय पर हो रही है जब टैरिफ और रूस से तेल खरीद जैसे मुद्दों को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद गहराए हुए हैं।

किसानों के हितों से समझौता नहीं करेगा भारत
भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि किसी भी व्यापार समझौते में किसानों के हित सर्वोपरि रहेंगे। अमेरिका चाहता है कि भारतीय बाजार में उसके कृषि उत्पादों को पूरी पहुंच मिले, लेकिन भारत इस मांग को मानने के मूड में नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि घरेलू किसानों को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
अमेरिकी वार्ताकार भारत में
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने जानकारी दी कि अमेरिकी वार्ताकार भारत पहुंच रहे हैं और मंगलवार को दोनों देशों के बीच व्यापारिक मुद्दों पर बातचीत होगी। भारत की ओर से स्पेशल सेक्रेटरी, राजेश अग्रवाल, डिपार्टमेंट ऑफ कॉमर्स, मुख्य वार्ताकार होंगे। खास बात यह है कि यह वार्ता उस समय हो रही है जब अमेरिका ने भारत पर 50% टैरिफ लगाया है। इसके अलावा, रूस से तेल खरीदने को लेकर भी अमेरिका भारत पर लगातार दबाव बना रहा है।
हाल ही में हुई थी अहम मुलाकात
भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने हाल ही में अमेरिकी सांसदों से मुलाकात की थी। उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार सहयोग, ऊर्जा क्षेत्र में साझेदारी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आपसी हितों पर बातचीत की। साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत यूक्रेन संघर्ष का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति के जरिए चाहता है।
क्वात्रा की ये मुलाकातें ऐसे समय हो रही हैं जब अमेरिका द्वारा अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने से दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण हो गए हैं।
G7 देशों पर दबाव डाल रहा है अमेरिका
पीटीआई भाषा के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर शुल्क लगाने की मांग कर रहे हैं। अमेरिकी वित्त मंत्री और व्यापार प्रतिनिधि ने हाल ही में G7 देशों से कहा कि रूस की युद्ध मशीन को फंडिंग रोकने के लिए संयुक्त कदम जरूरी हैं।
हालांकि बयान में किसी देश का नाम नहीं लिया गया, लेकिन अमेरिका अक्सर भारत और चीन को निशाना बनाता है। दिलचस्प बात यह है कि चीन पर अब तक कोई शुल्क नहीं लगाया गया, जबकि ट्रंप ने हाल ही में NATO देशों से अपील की है कि चीन पर 50 से 100 फीसदी टैरिफ लगाया जाए।
भारत का स्पष्ट रुख
भारत ने इस मामले पर दो टूक कहा है कि वह किसी भी बाहरी दबाव में फैसला नहीं करेगा। भारत का कहना है कि अमेरिका और यूरोपीय संघ खुद भी रूस से व्यापार कर रहे हैं, ऐसे में केवल भारत पर सवाल उठाना उचित नहीं है। भारत और चीन फिलहाल रूसी तेल के बड़े खरीदार हैं, लेकिन भारत अपने फैसले राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए लेगा।
आगे का रास्ता
भारत-अमेरिका की आगामी वार्ता दोनों देशों के रिश्तों में अहम मोड़ साबित हो सकती है। जहां अमेरिका चाहता है कि भारत उसकी शर्तों को स्वीकार करे, वहीं भारत ने साफ संकेत दिया है कि किसानों और ऊर्जा सुरक्षा पर किसी तरह का समझौता नहीं होगा। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या दोनों देश आपसी मतभेद दूर कर कोई साझा रास्ता निकाल पाते हैं या नहीं।
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