नई दिल्ली, जून 17। बढ़ती महंगाई पर काबू पाने के लिए अमेरिका के केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में 75 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर दी है। यह 1994 के बाद एक बार में की गई सबसे बड़ी बढ़ोतरी है। इसके अलावा केन्द्रीय बैंक ने साफ किया है कि अगली बैठक में ब्याज दरों में फिर 50 बेसिस अंक की बढ़ोतरी की जा सकती है। अमेरिका के बाद ब्रिटेन और स्विटजरलैंड ने भी ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर दी है। वहीं भारत में पहले ही आरबीआई अपनी रेपो रेट दो बार बढ़ा चुका है। आरबीआई ने 1 महीने में 2बार रेपो रेट में 90 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर दी है।

भारत में अभी और बढ़ेगी रेपो रेट की ब्याज दर
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज का मानना है कि आरबीआई अगस्त में होने वाली अगली मीटिंग में ब्याज दरों को फिर बढ़ा सकता है। इस बात की पूरी संभावना है कि उससे पहले अमेरिकी फेड रिजर्व एक एक और अपनी ब्याज दरें बढ़ा चुका होगा। अमेरिकी फेड रिजर्व की अगली बैठक जुलाई में तय है। इसका मतलब है कि आरबीआई को भी रेपो रेट में बढ़ोतरी करेगा। ऐसा माना जा सकता है कि दिसंबर तक रेपो रेट 6.50 फीसदी तक हो सकता है। यह रेपो रेट अभी 4.90 फीसदी है।
ब्याज दरें बढ़ने से बॉन्ड यील्ड बढ़ जाएगी
आरबीआई ने 8 जून को रेपो रेट में 50 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की थी। अगली पॉलिसी रिव्यू मीटिंग 2 से 4 अगस्त को होनी है। बैंकरों का मानना है कि इस बैठक में रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ सकता है। हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि महंगाई को काबू करने के लिए आरबीआई को 50 बेसिस पॉइंट तक की भी बढ़त कर सकता है। इससे बेंचमार्क बॉन्ड पर यील्ड बढ़ना तय है। इससे सरकार की उधारी कार्यक्रम पर असर पड़ेगा।
जानिए सरकारी कितना उधार लेना चाहती
वित्त वर्ष 2023 के लिए भारत सरकार का ग्रॉस बोरोइंग टारगेट 14.23 लाख करोड़ रुपये है, जो पिछले साल 12.05 लाख करोड़ रुपये था। इसमें से 8.45 लाख करोड़ रुपये की उधारी पहली छमाही में ली जा सकती है। इकॉनमी को पटरी पर लाने के लिए सकारी खर्च को अहम माना जा रहा है। इस बात की संभावना है कि आरबीआई प्राइमरी और सेकंडरी बायबैक्स के जरिए यील्ड में तेजी में देरी कर सकता है।


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