वाशिंगटन। अमेरिका ने भी चीन के खिलाफ भारत जैसा बड़ा कदम उठा लिया है। अमेरिकी संसद ने एक विधेयक पारित कर दिया है, जिसके तहत लगातार 3 साल तक अपनी ऑडिट सूचनाएं शेयर बाजार नियामक को नहीं देने वाली कंपनियां अमेरिकी शेयर बाजार से बाहर होंगी। ध्यान रहे कि भारत इससे भी कड़ा कदम पहले ही उठा चुका है। पीटीआइ की खबर के अनुसार, अमेरिकी संसद के इस कड़े कदम के बाद सूचनाएं छिपाने में माहिर चीनी कंपनियां दिक्कत में फंसेंगी।

दोनों सदनों में पास हो चुका है कानून
अमेरिका में इस विधेयक का नाम द्विपक्षीय हिस्सेदारी विदेशी कंपनी जवाबदेही कानून रखा गया है। उम्मीद है कि इस कानून से अमेरिकी निवेशकों और उनकी सेवानिवृत्ति की बचत को विदेशी कंपनियों से सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव ने बुधवार को इस नए कानून पर मुहर लगा दी है। वहीं यह कानून को ऊपरी सदन यानी सीनेट ने 20 मई को पारित हो चुका था। इस नए कानून को अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा। जैसे ही ट्रंप इस पर दस्तखत करेंगे यह अमेरिकी कानून का हिस्सा बन जाएगा। खबरों के मुताबिक, यह विधेयक उन कंपनियों को अमेरिकी शेयर बाजार में आने से रोकेगा, जिन्होंने लगातार 3 साल तक सार्वजनिक कंपनी लेखा निगरानी बोर्ड के ऑडिट नियमों का पालन नहीं किया है। अमेरिका में ऐसा करने वाली सबसे ज्यादा चीन की कंपनियां ही हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि इस कानून से सबसे ज्यादा नुकसान चीन की कंपनियों को ही होगा।
क्या पूछेगा यह कानून
अमेरिका के इस नए कानून में वहां कारोबार करने वाली कंपनियों को यह बताना होगा कि क्या वे चीन की कम्युनिस्ट सरकार समेत किसी विदेशी सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण में काम कर रही हैं या नहीं। इस कानून से यह सुनिश्चित होगा कि अमेरिका में कारोबार करने वाली विदेशी कंपनियां भी उन लेखा नियमों का पालन करें जो अमेरिकी कंपनियों पर लागू हैं। इस नए कानून के अमल में आने के बाद अमेरिका के शेयर बाजार में कारोबार कर रही उन कंपनियों पर गाज गिरेगी जो चीनी सरकार के नियंत्रण में हैं, लेकिन बताती नहीं हैं।
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