
UP Govt : उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा राज्य में निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण के सेक्टर में उद्योग लगाने वाले उद्यमी को राहत दी है। राज्य सरकार के द्वारा आरक्षित श्रेणी की जमीन को औद्योगिक भू-उपयोग में परिवर्तन कराने पर लगने वाले शुल्क को समाप्त कर दिया है। बुधवार को इस संबंध में प्रमुख सचिव राजस्व सुधीर गर्ग ने शासनादेश जारी कर दिया है। इतना ही नहीं इसके साथ ही जमीन लेने के लिए गाटा संख्या देने वाली जो अनिवार्यता है। इस अनिवार्यता को भी समाप्त कर दी गई है, तो आइए जानते हैं इसके बारे में।
गाटा संख्या उसका क्षेत्रफल देना बेहद आवश्यक होता था
राजस्व विभाग की तरफ से जारी की गई शासनादेश में कहा गया है। कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति 2023 के तहस यह सुविधा परियोजना को लगाने वाले उद्यमियों को दिया जाएगा। इसके साथ ही 12.5 एकड़ से ज्यादा भूमि है। यह अर्जन के लिए पूर्व में निर्धारित व्यवस्था के अनुसार, अगर उद्यमियों को जमीन लेना है, तो फिर गाटा संख्या उसका क्षेत्रफल देना बेहद आवश्यक होता था।
उद्यमी को केवल गांव का ही नाम देना होगा
इसी के चलते जो उद्यमी है। इनको कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। उद्यमीयों को तो कभी कभी काफी अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। यही वजह है कि इस व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है। जो नई व्यवस्था लागू की गई है। इसमें उद्यमी को केवल गांव का ही नाम देना होगा।
अब सिर्फ न्यायालय का शुल्क बस देना होगा
यूपी में राजस्व संहिता नियमावली में न्यायालय शुल्क के लिए दी गई जो व्यवस्था है। इस व्यवस्था में परिवर्तन कर दिया गया है। नई व्यवस्था के अनुसार, उद्घोषणा संबंधी व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है। अब सिर्फ न्यायालय का शुल्क बस देना होगा।


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