
UP Government : मोटे अनाज को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार प्रतिबद्ध दिख रही है। खाने की थाली में पोषक तत्व को बढ़ाने के लिए रागी, बाजरा, ज्वार आदि के जो व्यंजन हैं। एक बार फिर से बढ़ेंगे। कोरोना महामारी की वजह से आम लोगों के रोग प्रतिरोधक क्षमता में काफी अधिक असर पड़ा है। इसके बाद विशेषज्ञों को मोटे अनाज का ख्याल आया है। इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा मोटे अनाज के लिए 200 करोड़ रुपए की राशि खर्च की जाएगी, तो आइए जानते हैं इसके बारे में।
यूपी सरकार ने मोटे अनाज पुनरोद्धार पर 186.27 करोड़ रु खर्च करने का निर्णय लिया है
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शोध और अध्ययन हुए, तो यह पाया कि हरित क्रांति के नाम पर चावल और गेहूं की बढ़ती खेती की ने व्यक्ति की थाली से मोटे अनाज गायब ही कर दिए। यह जो मोटे अनाज है। यह कभी के मुख्य खाद्य पदार्थ हुआ करते थे। हरित क्रांति से व्यक्तियों की खाद्यान्न की आवश्यकता तो पूरी हुई, लेकिन लोगों का जो पोषण है। वह खत्म हो गया। इस कारण नई नई बीमारियां बढ़ी। अगर मोटे अनाज का निरंतर सेवन होता है, तो फिर पेट से जुड़ी हुई बीमारियां, मधुमेह, हृदयरोग सम्बंधी बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण रखता है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इसका ध्यान रखा है और इसके लिए यूपी सरकार ने मोटे अनाज पुनरोद्धार पर 186.27 करोड़ रु खर्च करने का निर्णय लिया है।
साल 2026-27 तक यह रकबा 25 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य है
लगभग 10.83 लाख हेक्टेयर में साल 2021-22 में मोटे अनाज की फसलों का उत्पादन आंका गया। वही, साल 2026-27 तक मोटे अनाज की बोआई का जो रकबा है।यह रकबा 25 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य है।
अब यूपी में जरूरतमंद राशन कार्ड धारकों मोटे अनाज मिला करेंगे
राज्य सरकार ने अब सार्वजनिक वितरण प्रणाली में जो मोटे अनाज है। इन अनाज को को भी शामिल करने का निर्णय किया है। अब यूपी में जरूरतमंद राशन कार्ड धारकों को सांवा, कोदों,ज्वार, बाजरा,काकून आदि मोटे अनाज भी मिला करेंगे।


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