
UP : अब लखनऊ स्थित चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महानिदेशालय से उत्तर प्रदेश के जिला अस्पतालों में मरीजों को दी जाने वाली सुविधाओं की निगरानी की जाएगी। इसमें शीघ्र ही कर्मियों की तैनाती की जायेगी और इसको शुरू किया जायेगा।
सभी जिला अस्पताल में लगे हुए सीसीटीवी कैमरों को इस कंट्रोल रूम से जोड़ा जाएगा और अस्पतालों पर नजर रखी जाएगी। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महानिदेशक डा. रेनू श्रीवास्तव वर्मा की तरफ से बताया गया है कि जल्द ही कंट्रोल रूम को शुरू किया जायेगा।
अस्पतालों को मंडलवार विभाजित किया जायेगा और यह अलग-अलग टीमें देखेगी कि अस्पतालों में ओपीडी में डॉक्टर मरीजों को ठीक से देख रहे है या नहीं देख रहे है।
अगर कही पर अधिक मरीज होने के वजह से भीड़ है, तो फिर तुरंत ही मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को फोन कर व्यवस्था में सुधार किया जाएगा। इससे ऐसे चिकित्सक जो देरी से आ रहे है उन चिकित्सक पर शिकंजा कसा जायेगा।
मरीजों को दवाई के काउंटर पर वक्त पर दवाई मिल रही है या नहीं मिल रही है। इसके साथ ही पैथोलाजी जांच के लिए जो मरीज आ रहे है वे बेवजह ही वापस तो नहीं जा रहे है। यह सभी कुछ महानिदेशालय से ऑनलाइन के माध्यम से देखा का सकेगा।
अगर इसमें कोई भी गड़बड़ी मिलती है, तो फिर जो जिम्मेदार अधिकारी है उन अधिकारियों को सुधार के लिए चेतावनी दी जाएगी। इसके बाद अगर फिर भी सुधार नहीं होता है, तो फिर कार्यवाही की जायेगी।
सभी जिला अस्पताल में आवश्यकता के मुताबिक, 15 से 20 सीसीटीवी कैमरे को लगाए गए है। अभी कुल 125 में से 100 जिला अस्पतालों को कंट्रोल रूम से जोड़ा जा रहा है। करीब 1 हजार 698 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए है। जो कंट्रोल रूम है इसमें 36 कंप्यूटर मानीटर लगाए गए हैं।
मंडलवार जिलों की निगरानी के लिए हर एक मंडल के लिए कम से कम 2-2 टीम बनाई जाएगी। मानव संसाधन का आकलन किया जा रहा है इससे आगे भी भर्ती की जाएगी।
यह जो इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम है। इस कंट्रोल रूम को बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन और पीरामल फार्मा के सहायता से बनाया जा रहा है।
प्रत्येक माडल के जो जिला अस्पताल है उन जिला अस्पतालों की अलग अलग निगरानी होगी। अस्पतालों में इमरजेंसी, दवा काउंटर आदि जगह में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों को कंट्रोल रूम से जोड़ा जा रहा है।
आगे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की भी ऑनलाइन के माध्यम से निगरानी के लिए भी प्रस्ताव किया जा रहा है।


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