Universal KYC: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपने केवाईसी (Know Your Customer) नियमों में बदलाव किया है, जिससे ग्राहकों को आधार-आधारित ई-केवाईसी, वीडियो केवाईसी और डिजिलॉकर के माध्यम से आसानी से जोड़ा जा सके।

इन बदलावों का फोकस बैंकिंग को बढ़ावा देना है, खासकर पहली बार अकाउंट खुलवाने वाले और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को इससे फायदा मिलेगा। बैंकों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे सेंट्रल केवाईसी रजिस्ट्री के साथ इंटीग्रेट हों और बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट्स का फायदा उठाएं। इसके अलावा वित्त मंत्रालय ने RBI, SEBI, IRDAI आदि को Universal KYC को लेकर भी तैयारी करने की सलाह दी है।
केवाईसी नियमों में बदलाव
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गुरुवार को अपने नो योर कस्टमर (केवाईसी) नियमों में कई संशोधन पेश किए, जिसका फोकस डिजिटल और फिजिकल दोनों माध्यमों से ग्राहकों को तेजी से, अधिक बेहतर ढंग से और आसानी से जोड़ना है।
आरबीआई (केवाईसी) (संशोधन) निर्देश, 2025 के तहत, केंद्रीय बैंक ने आधार-आधारित ई-केवाईसी, वीडियो केवाईसी और डिजिलॉकर डॉक्यूमेंट्स का यूज करके ग्राहकों को जोड़ने के लिए आसान प्रोसेस निर्धारित की हैं। इस कदम का उद्देश्य इंटीग्रेटेड बैंकिंग का समर्थन करना और पहली बार खाता खुलवाने वालों, खासकर डीबीटी, ईबीटी और पीएमजेडीवाई जैसी सरकारी योजनाओं के माध्यम से जुड़ने वालों के लिए प्रक्रिया को आसान बनाना है।
यूनिवर्सल केवाईसी क्या है?
हाल ही में वित्त मंत्रालय ने सभी वित्तीय नियामकों (जैसे RBI, SEBI, IRDAI आदि) को निर्देश दिया है कि वे मिलकर एक यूनिवर्सल KYC सिस्टम तैयार करें। इस सिस्टम का मकसद है कि ग्राहक को बार-बार अलग-अलग जगह KYC कराने की जरूरत न हो। एक बार KYC हो जाने के बाद वही जानकारी बैंक, बीमा, म्यूचुअल फंड, स्टॉक मार्केट जैसे सभी जरूरी वित्तीय सेवाओं में उपयोग की जा सके।
मिलेंगे ये सभी फायदे
इस यूनिवर्सल केवाईसी की मदद से ग्राहकों का समय और मेहनत बचेगी, फाइनेंशियल इन्क्लूजन को बढ़ावा मिलेगा, डिजिटल प्रक्रिया और ज्यादा मजबूत और सरल होगी और धोखाधड़ी की संभावनाएं कम होंगी। यह सिस्टम खास तौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद होगा जो पहली बार वित्तीय सेवाओं से जुड़ रहे हैं या ग्रामीण क्षेत्रों से हैं।


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