Budget 2026: माइग्रेंट वर्कर्स को बजट में मिलेगा बड़ी सौगात? एक्सपर्ट्स ने बताया क्या हो सकते हैं प्रावधान

Budget 2026: आगामी वित्त वर्ष 2026-27 के बजट को लेकर तैयारियां जोरों पर है। इस तैयारी के बीच तमाम सेक्टर्स के लोग कई तरह की उम्मीदें लगा रहे हैं। वहीं, माइग्रेंट वर्कर्स जिनको लेकर हमेशा राजनीति भी होती रहती हैं, उनके लिए इस बार के बजट में क्या-क्या प्रावधान होने की संभावना है, इसे लेकर चर्चाएं जोरों पर है।

Union Budget 2026

यूनियन बजट 2026-27 (फरवरी 2026 में पेश होने वाला) में माइग्रेंट वर्कर्स (प्रवासी मजदूरों) के लिए सीधे कोई विशेष प्रावधान की अभी तक आधिकारिक घोषणा या मजबूत अपेक्षा नहीं है। हालांकि, संभावित प्रावधानों को लेकर एक्सपर्ट्स अपने तरह से कयास लगा रहे हैं। चूंकि दिसंबर 2025 तक प्री-बजट कंसल्टेशन चल रहा है, जिनमें ट्रेड यूनियन्स, इंडस्ट्री और इकोनॉमिस्ट्स से चर्चा हो रही है। ऐसे में बजट का मुख्य फोकस रोजगार सृजन, एमएसएमई सपोर्ट, इंफ्रास्ट्रक्चर और लेबर रिफॉर्म्स पर रहने की उम्मीद है, जो अप्रत्यक्ष रूप से माइग्रेंट वर्कर्स (खासकर अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर में) को फायदा पहुंचा सकता है।

तो चलिए जानते हैं कि ILO (International Labour Organisation), सर्विस फर्म PwC की रिपोर्ट, डेलॉइट इंडिया समेत अन्य एक्सपर्ट्स के हिसाब से माइग्रेंट लोगों (माइग्रेंट वर्कर्स) के लिए भारत के यूनियन बजट 2026-27 में किन अहम मुद्दों या प्रावधानों पर फोकस रहने की संभावना है...

लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स में जोर और जॉब क्रिएशन

एक्सपर्ट्स के अनुसार, बजट में टेक्सटाइल्स, लेदर, फुटवियर, जेम्स एंड ज्वेलरी, हैंडीक्राफ्ट्स जैसे सेक्टर्स के लिए नई स्कीम्स या मौजूदा का विस्तार होगा, जो बड़ी संख्या में माइग्रेंट वर्कर्स को रोजगार देते हैं। डेलॉइट इंडिया की रूकमी मजुना ने कहा कि एमएसएमई और प्रायोरिटी सेक्टर्स पर फोकस रहेगा, जहां क्रेडिट एक्सेस और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार से जॉब्स बढ़ेंगे।

ग्रांट थॉर्नटन के ऋषि शाह ने हेल्थकेयर, फाउंडेशनल लर्निंग और स्किल्स में निवेश की सलाह दी, जो माइग्रेंट वर्कर्स की भागीदारी बढ़ाएगा। इससे अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर में जॉब प्रिजर्वेशन और क्रिएशन होगा।

सोशल सिक्योरिटी और वर्कर प्रोटेक्शन

चार नए लेबर कोड्स के रोलआउट के साथ, मिनिमम वेज, सोशल सिक्योरिटी और वर्कर प्रोटेक्शन पर फोकस रहेगा। आईएलओ की 2026-27 बजट प्रस्तावों में माइग्रेंट वर्कर्स के लिए पोर्टेबल सोशल प्रोटेक्शन, फेयर माइग्रेशन और राइट्स पर जोर है, जैसे कि सोशल प्रोटेक्शन फ्लोर्स का विस्तार अनऑर्गनाइज्ड/माइग्रेंट वर्कर्स तक।

यह भारत के संदर्भ में अनऑर्गनाइज्ड वर्कर्स के लिए ई-श्रम पोर्टल, हेल्थकेयर (पीएमजेएवाई) और गिग वर्कर्स के लिए आईडी/बेनिफिट्स का विस्तार कर सकता है। PwC के रिपोर्ट में स्किलिंग और बाइलेटरल एग्रीमेंट्स के जरिए माइग्रेंट वर्कर्स की सुरक्षा की सिफारिश है, जिसमें PMKVY (Pradhan Mantri Kaushal Vikas Yojana) और इंटरनेशनल स्किलिंग सेंटर्स को मजबूत करना शामिल है।

एमएसएमई और प्रभावित सेक्टर्स के लिए सपोर्ट

मोतिलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के गौतम दुगड़ ने टेक्सटाइल्स, ऑटो, ज्वेलरी जैसे सेक्टर्स के लिए टैक्स रिलीफ और क्रेडिट गारंटी की अपेक्षा जताई, जो जॉब्स बचाएंगे और माइग्रेंट वर्कर्स को फायदा देंगे। साथ ही, 8वीं पे कमीशन की सैलरी हाइक (जनवरी 2026 से) अप्रत्यक्ष रूप से इकोनॉमी को बूस्ट करेगी।

ग्लोबल और डोमेस्टिक माइग्रेशन पॉलिसी

PwC के एक्सपर्ट्स ने नेशनल माइग्रेशन पॉलिसी को मजबूत करने, स्किल गैप्स दूर करने और प्री-डिपार्चर ट्रेनिंग की सलाह दी, जो डोमेस्टिक माइग्रेंट्स के लिए भी लागू हो सकता है। वहीं, ILO ने माइग्रेंट्स के लिए यूनिवर्सल सोशल प्रोटेक्शन और सेफ एनवायरनमेंट पर फोकस किया, जिसमें भारत जैसे देशों के लिए बाइलेटरल फ्रेमवर्क्स शामिल हैं।

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