Union Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026-27 की तैयारियां शुरू हो गई हैं, जिसे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी, 2026 को संसद में मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के तीसरे बजट के रूप में पेश करेंगी। इस साल फरवरी में केंद्र सरकार ने केंद्रीय बजट 2025-26 में व्यक्तिगत टैक्सेशन में बदलाव की घोषणा की थी। ये सभी बदलाव नई टैक्स सिस्टम के तहत किए गए थे। इसके तहत 12.75 लाख रुपये तक की वार्षिक आय को टैक्स फ्री कर दिया गया था।

केंद्रीय बजट 2026 की तैयारी शुरु
केंद्रीय बजट 2026 की तैयारी की प्रक्रिया शुरू हो गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले सप्ताह की शुरुआत में प्रमुख अर्थशास्त्रियों के साथ विचार-विमर्श किया। इस बीच, उद्योग जगत ने नए केंद्रीय बजट को लेकर अपनी उम्मीदें व्यक्त की हैं। प्रमुख उद्योग मंडल पीएचडीसीसीआई ने वित्त मंत्रालय को केंद्रीय बजट 2026 के संबंध में अपनी उम्मीदों से अवगत करा दिया है। उद्योग मंडल का कहना है कि अगर सरकार अगले साल फरवरी की शुरुआत में पेश होने वाले बजट में डायरेक्ट और इनडायरेक्ट कर सुधारों को लागू करती है, तो इससे अर्थव्यवस्था को काफी लाभ होगा।
इनकम टैक्स रेट को कम करने की सिफारिश
पीएचडीसीसीआई ने सरकार को आयकर स्लैब में संशोधन करने की सलाह दी है। इसने 30 लाख रुपये तक की वार्षिक आय पर टैक्स को घटाकर 20%, 50 लाख रुपये तक की वार्षिक आय पर टैक्स को घटाकर 25% और इससे अधिक आय पर टैक्स की दर 30% रखने का सुझाव दिया है। इसने कहा है कि इससे मध्यम वर्ग पर कर का बोझ कम होगा। साथ ही, आयकर अनुपालन भी बढ़ेगा।
शेयर बायबैक पर टैक्स नियमों में बदलाव की भी मांग
चैंबर ने शेयर बायबैक के नियमों में भी बदलाव की मांग की है। चैंबर ने कहा है कि शेयर बायबैक से होने वाले लाभ को डिविडेंड इनकम के बजाय कैपिटल प्रॉफिट माना जाना चाहिए और फिर कैपिटल प्रॉफिट टैक्स नियम लागू होने चाहिए। पीएचडीसीसीआई का मानना है कि टैक्सपेयर्स को संशोधित और विलंबित रिटर्न दाखिल करने के लिए अधिक समय दिया जाना चाहिए। वर्तमान में, विलंबित और संशोधित आयकर रिटर्न दाखिल करने की लास्ट डेट आकलन वर्ष की 31 दिसंबर है।


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