Union Budget 2026: आगामी बजट को लेकर तैयारियां जोरों पर है। इस बीच तमाम सेक्टर्स से लेकर आम लोग तरह-तरह के छूट मिलने को लेकर कयास लगा रहे हैं। हालांकि अभी कुछ ही कहना जल्दबाजी होगा जब तक सरकार की ओर से किसी भी तरह का संकेत नहीं मिल जाता है।
आम लोगों से लेकर खास लोगों तक को सरकार से जो सबसे बड़ी राहत चाहिए वह है टैक्स में छूट। ऐसे आगे क्या होगा ये तो बजट पेश होने के बाद ही पता चलेगा, लेकिन उससे पहले आइए समझते हैं कि टैक्स राहत के मामले में पिछले पांच वर्षों के दौरान केंद्र सरकार ने किनको अधिक छूट दी है - व्यक्तिगत करदाताओं को या कॉरपोरेट कंपनियों को। इस संबंध में सरकार ने लोकसभा में जवाब भी दिया है।
लोकसभा में प्रस्तुत किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों के दौरान केंद्र सरकार ने व्यक्तिगत करदाताओं को कॉरपोरेट कंपनियों की तुलना में कहीं अधिक टैक्स राहत और छूट प्रदान की है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने संसद में एक तारांकित प्रश्न के उत्तर में यह महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।

उन्होंने आयकर अधिनियम 1961 के तहत दी गई विभिन्न कर छूटों और प्रोत्साहन योजनाओं का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। मंत्री ने रेखांकित किया कि हाल के वर्षों में सरकार का मुख्य ध्यान विशेष रूप से मध्यम वर्ग को वित्तीय राहत प्रदान करने पर केंद्रित रहा है।
पिछले पांच साल में टैक्स में किनको कितनी राहत मिली?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2023-24 की अवधि में, व्यक्तिगत करदाताओं और हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF) को मिली कर रियायतों का कुल राजस्व प्रभाव 8,69,907.40 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। यह दिखाता है कि आम नागरिकों को मिलने वाली राहत का दायरा काफी बड़ा रहा है।
इसकी तुलना में, समान पांच-वर्षीय अवधि के दौरान कॉरपोरेट सेक्टर को मिली टैक्स छूट का राजस्व प्रभाव 4,53,329.08 करोड़ रुपये रहा। यह आंकड़ा स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि सरकार ने कर राहत का एक बड़ा हिस्सा आम करदाताओं की ओर स्थानांतरित किया है, जो उसकी नीतिगत प्राथमिकता को उजागर करता है।
केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि सरकार ने कर प्रणाली को सुव्यवस्थित करने और अधिक से अधिक लोगों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) को लगातार मजबूत किया है। वर्तमान में, लगभग 75 प्रतिशत करदाता इस नई व्यवस्था को अपना चुके हैं। सरकार का मानना है कि कम कर स्लैब, कम जटिलता और सीधी राहत से कर अनुपालन में सुधार आता है।
न्यू टैक्स रिजीम में टैक्स में भारी छूट
नई कर व्यवस्था के तहत राहत का एक अहम आधार मूल छूट सीमा (Basic Exemption Limit) में क्रमिक बढ़ोतरी रही है। पहले यह सीमा 2.5 लाख रुपये थी, जिसे बजट 2023-24 में बढ़ाकर 3 लाख रुपये किया गया, और फिर बजट 2025-26 में इसे 4 लाख रुपये तक पहुंचा दिया गया। इस कदम से लाखों करदाताओं की कर देनदारी में सीधे कमी आई है, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिली है।
सरकार ने धारा 87A के तहत मिलने वाली कर छूट (टैक्स रिबेट) को भी काफी बढ़ाया है। नई कर व्यवस्था में अब 12 लाख रुपये तक की आय पर कोई कर देय नहीं है, जो पहले 7 लाख रुपये थी। वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए मानक कटौती जोड़ने पर यह सीमा 12.75 लाख रुपये तक पहुंच जाती है, जिसे मध्यम वर्ग के लिए सबसे बड़ी राहत माना जा रहा है।
इन बड़े नीतिगत बदलावों के अलावा, सरकार ने कई छोटे लेकिन असरदार सुधार भी लागू किए हैं। इनमें इनकम टैक्स स्लैब्स में कटौती, स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा बढ़ाना, लीव एनकैशमेंट पर अधिक छूट, TDS व TCS नियमों का सरलीकरण, और सालाना 1.25 लाख रुपये तक के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर कर छूट शामिल हैं। इन सभी का उद्देश्य कर बोझ कम कर निवेश को बढ़ावा देना है।
वित्त राज्य मंत्री ने यह भी बताया कि बजट 2025-26 में हुए कर सुधारों के परिणामस्वरूप, सरकार को करीब 1 लाख करोड़ रुपये के प्रत्यक्ष कर राजस्व का त्याग करना पड़ेगा। सरकार का कहना है कि यह राजस्व नुकसान एक जानबूझकर लिया गया फैसला है ताकि मध्यम वर्ग की खरीदने की शक्ति बढ़े, बचत को बढ़ावा मिले और अर्थव्यवस्था में मांग मजबूत हो।
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