Budget 2025: भारत में कब लीक हो गया था यूनियन बजट? आखिर क्यों देना पड़ा था वित्त मंत्री को इस्तीफा

Budget 2025: भारत का आम बजट 1 फरवरी को पेश किया जाएगा, जिसकी तैयारियां जोरों पर हैं। केंद्रीय बजट की गोपनीयता इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे सरकार और राष्ट्र को नुकसान पहुंचने से रोका जा सकता है। बजट की तैयारी से लेकर प्रस्तुति तक पूरी गोपनीयता बरती जाती है। बजट बनाने वाली टीम कई दिनों तक अपने परिवार और बाहरी दुनिया से अलग-थलग रहती है।

Budget 2025

बजट की जानकारी लीक होने से रोकने के लिए सुरक्षा उपाय कड़े किए गए हैं। बजट तैयार करने के लिए जिम्मेदार टीम के सदस्यों को बजट आधिकारिक रूप से पेश किए जाने तक अपने परिवारों से बात करने की इजाजत नहीं है। उनके फोन जब्त कर लिए गए हैं, ताकि समय से पहले कोई जानकारी लीक न हो।

सुरक्षा उपाय और जिम्मेदारियां

बजट की गोपनीयता बनाए रखने की जिम्मेदारी इसकी तैयारी में शामिल लोगों के कंधों पर होती है। सुरक्षा बढ़ाने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) और इंटेलिजेंस ब्यूरो लोकसभा में बजट पेश किए जाने से लगभग 15 दिन पहले अपने प्रयासों को तेज कर देते हैं। इसमें वित्त मंत्रालय और उसके अधिकारियों के आसपास सुरक्षा बढ़ाना शामिल है।

सुरक्षा उपायों में वृद्धि केवल दस्तावेजों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वित्त मंत्री और अन्य प्रमुख अधिकारियों की सुरक्षा तक भी है। इस जानकारी की सुरक्षा के महत्व को कम करके नहीं आंका जा सकता, क्योंकि अतीत में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं, जिनमें उल्लंघन के कारण गंभीर परिणाम सामने आए थे।

ऐतिहासिक बजट लीक

भारत का पहला स्वतंत्रता के बाद का बजट 1947-1948 वित्त मंत्री आर.के. शानमुखम चेट्टी ने पेश किया था। हालांकि, बजट पेश होने से पहले ही ब्रिटेन के वित्त मंत्री ह्यूग डाल्टन ने पत्रकारों को कर संबंधी बदलावों के बारे में बता दिया था, जिसके कारण पत्रकारों ने संबंधित खबरें प्रकाशित कीं, जिसके बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।

1950 में भी ऐसी ही घटना हुई थी जब वित्त मंत्री जॉन मथाई को बजट पेश करने के दौरान एक लीक का पता चला था। विपक्षी नेताओं ने इस लीक के कारण उनके इस्तीफे की मांग की थी, जिसकी शुरुआत राष्ट्रपति भवन से हुई थी, जहां उस समय बजट छपता था।

प्रिंटिंग जगह में बदलाव

स्वतंत्रता के बाद तीन में से दो बजट लीक होने के बाद गोपनीयता बनाए रखने को लेकर सवाल उठे। पता चला कि राष्ट्रपति भवन में छपाई के दौरान लीक हुआ था। नतीजतन, 1951 के बाद से छपाई का काम मिंटो रोड स्थित सरकारी प्रेस में चला गया, जिसके बाद 1980 में इसे वित्त मंत्रालय के नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में स्थानांतरित कर दिया गया।

इस बदलाव का उद्देश्य सरकारी परिसरों में छपाई प्रक्रिया के दौरान पहुंच को अधिक बेहतर ढंग से नियंत्रित करके सुरक्षा को बढ़ाना तथा आगे लीक को रोकना है।

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