नयी दिल्ली। 2019 की जनवरी-मार्च तिमाही में देश की शहरी बेरोजगारी दर गिर कर 9.3% रह गयी। सरकार की तरफ से जारी किये गये ताजा आँकड़ों के मुताबिक यह शहरी बेरोजगारी दर का पिछली कम से कम 4 तिमाहियों का सबसे निचला स्तर है। सांख्यिकी मंत्रालय की तिमाही नौकरी रिपोर्ट में सामने आये इन आँकड़ों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को कुछ राहत मिल सकती है। क्योंकि केंद्र सरकार पिछले काफी समस से अर्थव्यवस्था में सुस्ती और पर्याप्त नौकरियाँ न पैदा कर पाने की वजह से आलोचनाओं का सामना कर रही है। वहीं इससे पहले 2018 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में शहरी बेरोजगारी दर करीब 9.9% पर थी। सरकारी यह रिपोर्ट जल्द ही प्रकाशित कर सकती है। मगर इस रिपोर्ट में ग्रामीण बेरोजगारी दर को लेकर किसी तरह की जानकारी नहीं दी गयी है। इस रिपोर्ट को 'वर्तमान साप्ताहिक स्थिति' को आधार बना कर तैयार किया गया है। इस सिस्टम के तहत किसी व्यक्ति को उस सप्ताह में बेरोजगार माना जाता है, जिसमें वे एक घंटे के लिए भी काम न करे या उसे काम न मिले।

युवाओं में भी घटी बेरोजगारी
ताजा रिपोर्ट के मुताबिक युवा बेरोजगारी दर में भी गिरावट आयी है। 15-29 वर्ष की आयु के युवाओं, जो देश की कुल 1.3 अरब आबादी का एक तिहाई हैं, के बीच बेरोजगारी दर 23.7% से घट कर 22.5% रह गयी। जानकारी के लिए बता दें कि केंद्र सरकार को हाल के वर्षों में नौकरी डेटा को नियमित रूप से जारी न करने के लिए भी जनता की नाराजगी घेलनी पड़ी है। वहीं विपक्ष भी सरकार को इस मुद्दे पर लगातार घेरता रहा है।
45 सालों में सबसे अधिक बेरोजगारी
2019 के आम चुनावों से पहले फरवरी में लीक हुई जुलाई 2017-जून 2018 की अवधि की रिपोर्ट में बताया गया था कि देश में बेरोजगारी दर 45 सालो के ऊपरी स्तर पर पहुँच गयी है। बाकी ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि नियमित वेतन कर्मचारियों और सेल्फ-एम्प्लॉयड कर्मचारियों के एक वर्ग के बीच की रोजगार में वृद्धि हुई है। मगर अब भी श्रम बल भागीदारी दर (श्रम बल बनाने वाली जनसंख्या का प्रतिशत), जो पिछले साल अप्रैल-दिसंबर के बीच हल्की बढ़ी थी, जनवरी-मार्च तिमाही के दौरान इसमें 36% तक गिरावट दर्ज की गई।
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