नयी दिल्ली। कोरोनावायरस के मद्देनजर देश में लॉकडाउन 31 मई तक के लिए बढ़ा दिया गया है। हालांकि लॉकडाउन के तीसरे चरण में दी गई छूटों के बाद चौथे चरण में कई सारी ढील दी गई हैं। प्रमुख बिजनेस इन्फोर्मेशन कंपनी सीएमआईई की एक ताजा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि लॉकडाउन में राहत के बावजूद भारत में बेरोजगारी कम नहीं हो रही है। लॉकडाउन के बीच भारत में बेरोजगारी की दर 20 प्रतिशत से ऊपर बरकरार है। सीएमआईई के आंकड़ों के अनुसार 17 मई को समाप्त सप्ताह के लिए बेरोजगारी दर 24.01 प्रतिशत थी, जबकि एक सप्ताह पहले ये 23.97 प्रतिशत थी। यानी घटने के बजाय बेरोजगारी दर उल्टे बढ़ी है। हालाँकि धीरे-धीरे उद्योग खुलने के साथ श्रम भागीदारी दर (Labour Participation Rate) में इजाफा हुआ है। 26 अप्रैल को समाप्त सप्ताह के लिए श्रम भागीदारी दर 35.4 प्रतिशत थी, जो अब 38.8 प्रतिशत है।

अप्रैल के बराबर है बेरोजगारी
रिपोर्ट में कहा गया है कि मई मध्य तक बेरोजगारी दर अप्रैल के बराबर ही बनी हुई है। 20 अप्रैल से लॉकडाउन में दी गई छोटी सी छूट का कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार लगातार उच्च बेरोजगारी दर बताती है कि काम करने के लिए तैयार लेबर का एक बड़ा हिस्से काम नहीं मिल रहा है। इसके आंकड़ों से पता चलता है कि 17 मई को खत्म हुए हफ्ते में ग्रामीण भारत में 23 प्रतिशत की तुलना में शहरी भारत में बेरोजगारी दर 27 प्रतिशत रही। जबकि श्रम भागीदारी ग्रामीण क्षेत्रों में 41 प्रतिशत और शहरी इलाकों में 34 प्रतिशत रही।
लॉकडाउन से बड़ा खतरा
पिछले महीने एक रिपोर्ट आई थी, जिसमें बताया गया था कि कोरोनावायरस के कारण लॉकडाउन के बीच भारत के सिर्फ निर्यात सेक्टर में लगभग 1.5 लोग बेरोजगार हो सकते हैं। सीएमआईई के अनुसार लॉकडाउन के बाद अर्थव्यवस्था को फिर से शुरू करना इसलिए एक बड़ी चुनौती होगी क्योंकि सरकार ने जो आर्थिक पैकेज घोषित किया है उसके एक बड़े हिस्से में एमएसएमई और स्ट्रीट हॉकरों को आसान लोन मिलेगा, मगर इससे कोई बड़ा सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है।


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