Umid card Railway: इंडियन रेलवे ने अपने कर्मचारियों, पेंशनर्स और कर्मचारियों के परिवार वालों के स्वास्थ्य को लेकर बड़ा फैसला लिया है. रेलवे कर्मचारी अब 100 रुपये के कार्ड के जरिए एम्स और पैनल में शमिल किसी भी अस्तपताल से इलाज करा पाएंगे. उन्हें अब डॉक्टर के रेफरल की जरूरत नहीं पड़ेगी. ये बदलाव लगातर कर्मचारियों और पेंशनर्स की शिकायतों के बाद किया गया है.

भारतीय रेलवे ने साल 2019 में उम्मीद कार्ड (यूनियन मेडिकल आईडेंफिकेशन कार्ड) की घोषणा की थी. इस कार्ड का उद्देश्य था कि सभी रेलवे कर्मचारियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिलें. इस कार्ड का फायदा रेलवे विभाग में काम कर चुके पेंशनर्स और कर्मचारी के परिवार वाले भी उठा सकते हैं. इस कार्ड को बनाने के लिए मात्र 100 रुपये देने होते हैं.
अब रेलवे विभाग ने कार्ड को और सुविधाजनक बनाने के लिए इसमें बड़ा बदलाव किया है. इस बदलाव के बाद रेलवे कर्मचारी अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थानों (एम्स अस्पताल) में मुफ्त में इलाज करा सकते हैं. सिर्फ इतना ही रेलवे कर्मचारी पैनल में शमिल अन्य अस्पतालों में भी अपना इलाज करा सकते हैं.
इस बदलाव का फायदा सिर्फ रेलवे कर्मचारियों को नहीं, बल्कि रेलवे में काम करने वाले पेंशनर्स और रेलवे कर्मचारियों के परिवार को भी मिलेगा.
इस बारे में मिली जानकारी के मुताबिक रेलवे की इस नई सुविधा से 12.5 लाख कर्मचारी, 15 लाख से ज्यादा पेंशनर्स और 10 लाख परिवार के सदस्यों को फायदा होगा.
शिकायत के बाद किया गया बदलाव
रेलवे विभाग के कर्मचारियों और पेंशनर्स लंबे समय से उम्मीद कार्ड को लेकर शिकायत कर रहे थे. रेलवे कर्मचारी और पेंशनर्स का कहना था कि डॉक्टर अपने मुताबिक अस्पतालों में रेफरल कर देते थे. जिनमें उनका इलाज भी अच्छे से नहीं हो पाता.
यह कहा जा रहा है कि रेलवे की इस बदलाव के बाद कर्मचारी और पेंशनर्स बिना रेफरल के इलाज करा पाएंगे. अब कर्मचारी और पेंशनर्स अपने अनुसार इलाज करा पाएंगे.
यह पता चला है कि अब रेलवे के सभी कर्मचारियों और पेंशनर्स को राष्ट्रीय संस्थानों जैसे पीजीआईएमईआर चंडीगढ़, जेआईपीएमईआर पुडुचेरी, निमहंस बेंगलुरु, और देश के 25 एम्स अस्पताल में इलाज के लिए किसी तरह के रेफरल की आवश्यकता नहीं पड़ेगी.
कर्मचारी और पेंशनर्स कार्ड के जरिए इलाज के साथ-साथ दवाएं भी ले पाएंगे.
बिना कार्ड के ऐसे कराएं इलाज
उम्मीद कार्ड (यूनियन मेडिकल आईडेंफिकेशन कार्ड) के जरिए रेलवे कर्मचारी से लेकर पेंशनर्स अपना इलाज करा पाएंगे. यह कार्ड आपातकालीन स्थिति में भी लागू होगा. जिसका मतलब है कि अगर कोई इमरजेंसी होती है, तो कर्मचारी-पेंशनर्स कार्ड के जरिए इलाज करा पाएंगे.
अगर कोई अपना उम्मीद कार्ड भूल जाएं या उनके पास यह कार्ड मौजूद ना हो, तो वे उम्मीद नंबर के जरिए भी मुफ्त इलाज का लाभ ले पाएंगे.
इसके अलावा कुछ विशेश स्थितियों में ही डॉक्टर मारीज को विशेष अस्पताल में रेफरल करेंगे. यह रेफरल 30 दिनों के लिए मान्य होगा. अगर कोई रेफरल लेकर 30 दिन बाद जाता है, तो वे कार्ड का लाभ नहीं ले पाएंगे.
सोमवार को लागू हुई नई सुविधा
इस बारे में मिली जानकारी के मुताबिक सोमवार को रेलवे बोर्ड के कार्यकारी निदेशक प्रणव कुमार मालिक ने उम्मीद कार्ड (यूनियन मेडिकल आईडेंफिकेशन कार्ड) के जारी करने के आदेश दिए थे.
उम्मीद कार्ड और हेल्थ मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम (HMIS) के जरिए डिजीलॉकर में रखा जाएगा. इस कार्ड को कर्मचारी और पेंशनर्स अपने प्रोफाइल पर भी देख पाएंगे.


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