Indian Spices Latest News: पिछले कुछ समय से भारतीय फेमस मासलों की ब्रांड Everest और MDH विवादों में घिरा हुआ है। इन मसालों की गुणवत्ता को लेकर शुरू हुआ मामला खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है।
जहां एक तरफ हांगकांग और सिंगापुर ने पहले ही इन ब्रांड के मसालों पर बैन लगा दिया है वहीं, अब ब्रिटेन सरकार ने भारतीय मसालों के आयात पर सख्त पहरा लगाते हुए जांच का दायरा और बढ़ा दिया है।

क्या है इन फेमस ब्रांड से जुड़ा हुआ मामला?
इन दोनों ब्रांड पर आरोप लगा था कि इनके कुछ मसालों में कैंसर पैदा करने वाले कीटनाशक एथिलीन ऑक्साइड का उच्च स्तर है।
सिंगापुर ने भी एवरेस्ट को मसाले वापस लेने की घोषणा की थी और न्यूजीलैंड, संयुक्त राज्य अमेरिका, भारत और ऑस्ट्रेलिया ने कहा है कि वे दोनों ब्रांड से संबंधित मुद्दों पर विचार कर रहे हैं। हालांकि MDH और एवरेस्ट ने कहा है कि उनके उत्पाद उपभोग के लिए सुरक्षित हैं।
ब्रिटेन ने भारतीय मसालों के खिलाफ लिया यह फैसला
आपको बता दें कि ब्रिटेन की खाद्य सुरक्षा एजेंसी (FSA) ने अब तक की सबसे सख्त कार्रवाई करते हुए कहा है कि वो भारत से आने वाले सभी मसालों पर जहरीले कीटनाशकों की जांच को और सख्त कर रही है, जिसमें एथिलीन ऑक्साइड भी शामिल है।
एजेंसी ने यह कदम हालिया चिंताओं को देखते हुए उठाया है। हालांकि, इस बात को स्पष्ट नहीं किया गया है कि वो किन तरीकों से इस जांच को और मजबूत बनाएगी।
ब्रिटेन के खाद्य नीति के डिप्टी डायरेक्टर जेम्स कूपर ने रॉयटर्स को बयान में बताया कि यहां एथिलीन ऑक्साइड के इस्तेमाल की अनुमति नहीं है और जड़ी बूटियों और मसालों के लिए अधिकतम अवशेष स्तर तय किए गए हैं।
वहीं, भारत का मसाला बोर्ड, जो निर्यात को नियंत्रित करता है, उन्होंने इस पर अभी तक कोई कॉमेंट नहीं किया है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा मसाला उत्पादक, उपभोक्ता और निर्यातक है।
इन देशों में MDH और Everest के उत्पाद का होता है इस्तेमाल
आपको बता दें कि MDH और एवरेस्ट अपने उत्पादों को अमेरिका, यूरोप, दक्षिण पूर्व एशिया, मध्य पूर्व और ऑस्ट्रेलिया सहित कई क्षेत्रों में निर्यात करते हैं।
भारतीय नियामकों ने सभी मसाला उत्पादों का परीक्षण भी किया है और MDH और एवरेस्ट उत्पादों के नमूनों का निरीक्षण किया है। हालांकि अभी तक कोई परिणाम सार्वजनिक नहीं किया गया है।
ऑब्जर्वेटरी ऑफ इकोनॉमिक कॉम्प्लेक्सिटी वेबसाइट के अनुसार, साल 2022 में ब्रिटेन ने 128 मिलियन डॉलर मूल्य के मसालों का आयात किया था, जिसमें से लगभग 23 मिलियन डॉलर का हिस्सा भारत से आया था।
भारत के नियामकों ने भी सभी मसाला प्रोडक्ट की जांच की है और MDH और Everest प्रोडक्ट के सैंपल की जांच की है, हालांकि अभी तक कोई नतीजे सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
रॉयटर्स द्वारा यूएस एफडीए डेटा के विश्लेषण में पाया गया है कि साल 2021 के बाद से, अमेरिका में एमडीएच की लगभग 14.5 प्रतिशत उत्पादों को साल्मोनेला नामक बैक्टीरिया की मौजूदगी के कारण अस्वीकार कर दिया गया है।
कनाडा भी रख रहा है मासालों पर नजर
कनाडा की खाद्य निरीक्षण एजेंसी ने रॉयटर्स को यह जानकारी दी कि MDH और Everest के प्रोडक्ट को लेकर चिंताओं की जानकारी है और वो इस स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि अभी तक मिली जानकारी के आधार पर, हमारे पास यह सुझाव देने का कोई सबूत नहीं है कि उठाए गए मुद्दे कनाडा के बाजार में मौजूद प्रोडक्ट को प्रभावित करते हैं या नहीं।
हांगकांग ने इस कारण से लगाया था बैन?
सबसे पहले सिंगापुर ने एवरेस्ट के कुछ मसालों पर बैन लगाया था। इसके बाद, हांगकांग स्पेशल एडमिनिस्ट्रेटिव रीजन की सरकार के सेंटर फॉर फूड सेफ्टी (सीएफएस) ने रूटीन सर्वेलैंस प्रोग्राम के दौरान एमडीएच समूह के तीन मसालों जिनमें मद्रास करी पाउडर, सांभर मसाला पाउडर और करी पाउडर शामिल है उनमें एथिलीन ऑक्साइड की अधिक मात्रा होने के कारण इन मसालों पर बैन लगया था।


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