नयी दिल्ली। गांव में रहने वालों के पास कमाई के बहुत कम मौके होते हैं। यदि महिलाएं काम करना चाहें तो रोजगार के मौके और भी सीमित हो जाते हैं। मगर एक गांव की महिलाओं ने शानदार मिसाल की है। इस गांव में कई महिलाएं सालाना लाखों रु की कमाई कर रही हैं। ये महिलाएं दूसरों के लिए भी प्रेरणा हैं। बता दें कि झारखंड के सीताडीह नाम के एक छोटे से गांव की महिलाओं ने हल्दी की खेती से मिसाल कायम की है। आइए जानते हैं इनकी पूरी कहानी।
गांव में होती है हल्दी की खेती
आम तौर पर झारखंड में धान की खेती को ज्यादा तवज्जो दी जाती है। मगर राज्य के सीताडीह नामक गांव में महिलाएं हल्दी की खेती करती हैं। इस गांव में महिलाओं का हल्दी की खेती करना कोई नया ट्रेंड नहीं है, बल्कि यहां पारंपरिक तौर पर हल्दी की खेती होती है। खेती के बाद हल्दी ढेंकी में पीसी जाती है। ढेंकी हल्दी पीसने का पारंपरिक यंत्र होता है। यहां हल्दी पीसने में मशीन का इस्तेमाल नहीं होता।
कितनी हो रही कमाई
सीताडीह गांव की महिलाएं हल्दी की फसल को 100-160 रु प्रति किलो के रेट पर बेचती हैं। इससे प्रति महिला को सालाना 1.5-2 लाख रु कमाई होती है। सीताडीह गांव हल्दी की खेती पर निर्भर है। गांव के किसानों को प्रति एकड़ हल्दी की खेती पर 1 लाख रु का मुनाफा कमाते हैं। इतनी जमीन पर 10 क्विंटल हल्दी पैदा होती है। इस गांव के बहुत से किसान 3-4 एकड़ में हल्दी की खेती कर और भी ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं।
हिम्मत न हारने वाली महिलाएं
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फसल के बाद जड़ को सुखा कर अपने पास रख लिया जाता है क्योंकि इसी से दोबारा खेती होती है। पिछले 15 सालों से इस गांव की महिलाएं हल्दी की ही खेती से गुजारा कर रही हैं। ये गांव काफी बीहड़ में है। यहां तक जाने का कोई भी ठीक साधन नहीं है। 50 घरों वाले गांव में मोबाइल नेटवर्क नहीं हैं। लोग हल्दी को साइकिल पर ले जाते हैं। मुसीबत ये है कि सड़कें भी अच्छी नहीं हैं।
मार्केट की है जरूरत
यहां के लोगों को मार्केट तक पहुंच की जरूरत है। अगर उन्हें और बढ़िया सुविधाएं और अच्छी मार्केट मिले तो यहां कि महिलाएं अधिक मुनाफा कमा सकती हैं। बल्कि यहां तक माना जा रहा है कि अगर इस तरफ सरकार ध्यान दे तो गांव को हल्दी उत्पादन का केंद्र बनाया जा सकता है।
और बढ़ सकती है आत्मनिर्भरता
हल्दी उत्पादन का केंद्र बनने से गांव के किसानों को और भी कई लाभ हो सकते हैं। इससे दूसरे गांवों में हल्दी की खेती को लेकर जागरुकता पैदा की जा सकती है। किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए नकदी फसलों की मदद भी ली जा सकती है। आपको जानकर शायद हैरानी हो सकती है मगर भारत दुनिया में हल्दी का सबसे बड़ा उत्पादक, उपभोक्ता और निर्यातक है। भारतीय हल्दी को इसके हाई करक्यूमिन कंटेंट के कारण विश्व बाजार में सबसे अच्छा माना जाता है। भारत की दुनिया के हल्दी उत्पादन में लगभग 80 प्रतिशत और विश्व निर्यात में 60 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
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