भारतीय शेयर बाजारों के अलावा दुनियाभर की नजर पिछले शुक्रवार को हुई अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के प्रेसिडेंट जेलेंस्की की बातचीत पर रही. लेकिन यहां मामला उम्मीद के बिलकुल अलग हुआ. क्योंकि दोनों देशों के शीर्ष नेताओं में ठन गई और अंत में जेलेंस्की का पूरा दौरा बेहद कम समय में ही खत्म हो गया. दरअसल, यहां यूक्रेन और रूस के बीच जारी 3 सालों के संघर्ष को रोकने को लेकर बातचीत होनी थी. हालांकि, बात बिगड़ने के बाद यह मामला थोड़ा आगे तक खिसक सकता है. जबकि ब्रिटेन और फ्रांस यूक्रेन को शांति के लिए दबाव बना सकते हैं. शुक्रवार को बाजार बंद होने के बाद हुई इस घटना का असर सोमवार को ग्लोबल मार्केट पर देखने को मिल सकता है. यह भारतीय शेयर बाजारों को भी प्रभावित कर सकता है.
क्या ट्रंप-जेलेंस्की विवाद का बाजार पर होगा असर?
ट्रम्प और ज़ेलेंस्की के बीच चर्चाओं पर बाजार एनलिस्ट्स की गहरी नज़र थी, जिन्हें पॉजिटिव रिजल्ट की उम्मीद थी जिससे तनाव कम हो सकता था. लेकिन डोनाल्ड ट्रम्प के रूस-यूक्रेन संघर्ष से पीछे हटने और रूस के लिए उनके खुले सपोर्ट की वजह से यह नहीं हो सका. ऐसे में भारत के आर्थिक हितों ख़ास तौर पर रूस से कम कीमत पर कच्चा तेल खरीदने और फिर उसे यूरोपीय देशों को एक्सपोर्ट करने की उसकी क्षमता को लेकर रिस्क बढ़ सकता है.
भारत के लिए बढ़ेगी टेंशन!
अमेरिका की ओर से रूस को सपोर्ट मिलने से भारत के लिए टेंशन वाली बात हो सकती है. क्योंकि भारत रूस से रियायती दरों पर तेल खरीदता है और फिर यूरोपीय देशों को एक्सपोर्ट करता है. इसका फायदा भारत की इकोनॉमी को मिल रहा था, लेकिन ट्रम्प-जेलेंस्की मीटिंग के बाद यह फायदा जल्द ही खत्म हो सकता है. वहीं, यूरोपीय देशों की ओर से संघर्ष से पीछे हटने और रूस पर बैन हटाने की संभावना सोमवार से भारतीय शेयर बाजार पर असर डाल सकते हैं. इसके अलावा बैठक के बाद अमेरिका-रूस के बीच दोस्ती न केवल रूस के साथ बल्कि अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ डिफेंस डील्स में भारत की बढ़त को भी प्रभावित कर सकती है.
मार्केट एनलिस्ट्स ट्रम्प-जेलेंस्की मीटिंग से भारतीय शेयर बाजार के लिए 5 अहम नतीजे के तौर पर देख रहे हैं...
- जियो-पॉलिटिकल टेंशन में इजाफा
- भारत के एक्सपोर्ट पर निगेटिव असर
- भारतीय रुपए पर डिप्रेशियंस का दबाव
- महंगाई बढ़ने की टेंशन
- विदेशी निवेशकों (FIIs) की ओर से बिकवाली में बढ़त

ट्रंप-जेलेंस्की के बीच क्या हुआ?
यूक्रेन के प्रेसिडेंट वोलोदिमीर जेलेंस्की 28 फरवरी को अमेरिका के व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस पहुंचे. यहां उनके और अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप और वॉइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस के बीच तीखी बहस हुई. बातचीत में तल्खी इतनी बढ़ गई कि दोनों देशों के बीच होने वाला खनिज समझौता भी नहीं हुआ. जेलेंस्की मीटिंग को बीच में छोड़कर ही अपने देश लौट गए.
भारतीय शेयर बाजारों में 5वें महीने गिरावट
शेयर बाजार फरवरी में सेंसेक्स और निफ्टी 6% तक फिसल गए हैं. बाजार की कमजोरी में निवेशकों को तगड़ा नुकसान हुआ है, एक्सचेंज आंकड़ों के मुताबिक करीब 40 लाख करोड़ रुपए का घाटा निवेशकों को हुआ. बाजार में लगातार बिकवाली से करीब 28 साल पुराना रिकॉर्ड टूट गया है. इससे पहले 1996 में इतनी लंबी गिरावट दर्ज की गई थी. निफ्टी 50 में फरवरी के दौरान लगातार 5वें महीने गिरावट दर्ज की गई. बाजार 27 सितंबर 2024 के ऑल टाइम हाई से काफी टूट चुका है. रिकॉर्ड हाई से सेंसेक्स और निफ्टी करीब 15-16% तक फिसल चुके हैं.


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