नई दिल्ली, जून 8। गेहूं के निर्यात पर भारत सरकार द्वारा लगाए गए अचानक प्रतिबंध ने चावल के व्यापारियों को खरीदारी बढ़ाने और लंबी अवधि की डिलीवरी के लिए असामान्य ऑर्डर देने के लिए प्रेरित किया है। व्यापारियों में डर है कि दुनिया का शीर्ष चावल निर्यातक भारत चावलों की शिपमेंट को भी प्रतिबंधित कर सकता है। इसलिए वे तेजी से निर्यात डील कर रहे हैं। बता दें कि पिछले दो हफ्तों में व्यापारियों ने जून से सितंबर तक शिपमेंट के लिए 10 लाख टन चावल निर्यात करने के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं और कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर करने के बाद जल्दी से लेटर ऑफ क्रेडिट (एलसी) खोल रहे हैं ताकि कॉन्ट्रैक्ट में तय मात्रा को जल्दी से बाहर भेजा जा सके, फिर भले ही भारत सरकार चावल निर्यात को प्रतिबंधित करे।
96 लाख टन के लिए कॉन्ट्रैक्ट
व्यापारी पहले ही इस साल लगभग 96 लाख टन चावल का निर्यात कर चुके हैं। अतिरिक्त 10 लाख टन के कॉन्ट्रैक्ट इस 96 लाख टन के ऊपर किए गए हैं। आने वाले महीनों के दौरान अन्य खरीदारों के लिए उपलब्ध अनाज की मात्रा को कम किया जा सकता है क्योंकि लोडिंग शेड्यूल पूरा हो जाएगा। डेकन हेराल्ड की रिपोर्ट के अनुसार भारत के सबसे बड़े चावल निर्यातक सत्यम बालाजी के कार्यकारी निदेशक हिमांशु अग्रवाल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापारियों ने अगले तीन से चार महीनों के लिए प्री-बुकिंग की और सभी ने लगातार कारोबार सुनिश्चित करने के लिए एलसी खोले।
वियतनाम और थाईलैंड में चावल की मांग
आम तौर पर व्यापारी चालू और अगले महीने के सौदों पर हस्ताक्षर करते हैं। भारत से आक्रामक खरीदारी वियतनाम और थाईलैंड से चावल की मांग को भी कम कर सकती है, जो दुनिया के दूसरे और तीसरे सबसे बड़े निर्यातक हैं। ये कीमत पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
गेहूं पर प्रतिबंध और चावल की खरीद
भारत ने पिछले महीने अचानक गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। जबकि कुछ दिनों पहले कहा गया था कि इस साल रिकॉर्ड शिपमेंट का टार्गेट है। सरकार ने चीनी निर्यात पर भी सीमा तय कर दी। भारत एक टॉप वैश्विक गेहूं निर्यातक नहीं है, लेकिन यह ब्राजील के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी निर्यातक है। इन निर्यात प्रतिबंधों ने अटकलें लगाईं कि भारत चावल के शिपमेंट को भी सीमित कर सकता है, हालांकि सरकारी अधिकारियों ने कहा कि भारत ऐसा करने की योजना नहीं है क्योंकि उसके पास पर्याप्त चावल का स्टॉक है और स्थानीय कीमतें राज्य द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य से कम हैं। मगर व्यापारी घबरा गए थे। इसलिए उन्होंने पहले ही चावल की निर्यात डील कर दी, क्योंकि प्रतिबंध लगने पर पहले से की गयी डील को पूरा करने की छूट मिल जाती है।
वैश्विक चावल व्यापार में भारत का हिस्सा
वैश्विक चावल व्यापार में भारत का हिस्सा 40% से अधिक है। भारत के गेहूं प्रतिबंध के कारण बंदरगाहों पर बड़ी मात्रा में अनाज फंस गया था क्योंकि सरकार ने केवल एलसी द्वारा समर्थित कॉन्ट्रैक्ट के तहत आने वाले अनाज को भेजने की अनुमति दी थी। आम तौर पर लोग जहाज को नॉमिनेट करते समय एलसी खोलते हैं। इस बार व्यापारियों ने सभी चावल अनुबंधों के लिए एलसी खोले, इसलिए यदि निर्यात पर प्रतिबंध भी लगे, तो कम से कम अनुबंधित मात्रा वाले चावल को बाहर भेजा जा सकेगा।
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