नयी दिल्ली। सरकार ने अर्थव्यवस्था को सहारा देने और भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज सहित कोरोनवायरस के प्रभाव से निपटने के लिए कई उपाय किए हैं। हालांकि घरेलू बाजार में टैक्स कलेक्शन में भारी गिरावट आई है। इसके पीछे खपत में गिरावट और जीडीपी की कमजोर हालत है। मुआवजा उपकर जीएसटी फ्रेमवर्क का हिस्सा है, जिससे मैन्युफैक्चरिंग राज्यों की टैक्स आय में नुकसान की भरपाई की जाती है। जीएसटी गंतव्य आधारित टैक्स है। यानी खपत वाले राज्यों को राजस्व मिलता है। मैन्युफैक्चरिंग राज्य इस टैक्स से बाहर हो जाते हैं जो पहले उनके द्वारा कलेक्ट किया जाता था। इसीलिए मैन्युफैक्चरिंग राज्य को क्षतिपूर्ति करने के लिए गारंटीड पांच साल के उपकर फार्मूले को जीएसटी फ्रेमवर्क में लागू किया गया। अब गिरती टैक्स आय को बढ़ाने के लिए पान मसाला, सिगरेट और तंबाकू उत्पाद, कैफीनयुक्त पेय, मोटर वाहन जैसी वस्तुओं पर अतिरिक्त उपकर लगाया जाएगा और उससे राज्यों के नुकसान की भरपाई होगी।
तंबाकू सेक्टर से बढ़ सकता है टैक्स
भारत में एक सेक्टर है जो टैक्स राजस्व बढ़ाने में मदद कर सकता है वह है तंबाकू उद्योग। तंबाकू (सिगरेट, बीड़ी, धुआं रहित तंबाकू आदि) को 28 प्रतिशत की जीएसटी की उच्चतम स्लैब में रखा जाता है। फिर इस पर राष्ट्रीय आपदा आकस्मिक शुल्क (एनसीसीडी) जैसे अतिरिक्त शुल्क लगाये जाते हैं। इसके बाद जैसा कि बताया गया मुआवजे के लिए स्टेट्स एक्ट, 2017 के जरिए तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त मुआवजा उपकर जीएसटी सिस्टम के तहत पहले से ही लगाया हुआ है। मालूम हो कि भारत में दुनिया तंबाकू उपयोगकर्ताओं की दूसरी सबसे बड़ी संख्या (लगभग 26.8 करोड़ या भारत में सभी वयस्कों की 28.6%) है।
बजट में बढ़ाया गया था एनसीसीडी
केंद्रीय बजट 2020-21 में तंबाकू उत्पादों पर एनसीसीडी में वृद्धि की गई थी। हालांकि सिगरेट पर जीएसटी का अधिकांश मुआवजा उपकर स्पेसिफिक है और पिछले दो वर्षों में इसे संशोधित नहीं किया गया है। जून 2020 में जीएसटी परिषद (संघीय और राज्य दोनों सरकारों के वित्त मंत्रियों के प्रतिनिधियों के सर्वोच्च निर्णय लेने वाला निकाय) ने तंबाकू उत्पादों पर उपकर की दर को 4000 रुपये प्रति 1000 स्टिक (लगभग 290% एड-वालोरेम) पर सीमित करने का निर्णय लिया था। हालाँकि राज्यों के बीच आम सहमति की कमी के कारण बीड़ी पर उपकर लगाने का निर्णय टाल दिया गया था।
क्या कहता है डब्लूएचओ
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) सभी तंबाकू उत्पादों पर रिटेल मूल्य में कम से कम 75 फीसदी टैक्स की सिफारिश करता है। वैसे भारत में सिगरेट की कीमत में कुल टैक्स 49.5% और धूम्रपान रहित तम्बाकू पर 63.7% है, जो डब्लूएचओ की सिफारिश से काफी कम है। दूसरी ओर बीड़ी, सिगरेट के बराबर ही हानिकारक होने के बावजूद, पर 22% का बहुत कम टैक्स बोझ है। सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी सिगरेटों पर समान रूप से मुआवजा उपकर बढ़ाने के लिए कहते हैं। बीड़ी पर कम से कम अतिरिक्त 1 रु उपकर प्रति बीड़ी और धुआं रहित तंबाकू पर कोविड उपकर लगाने का सुझाव भी दिया गया है। सुस्त आर्थिक वृद्धि का मुकाबला करने और अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए इन उत्पादों पर ये उपकर लगाना जरूरी हो सकता है।
More From GoodReturns

Gold Rate Today: 25 मार्च को कई दिनों बाद सोने की कीमतों में जबरदस्त उछाल! जानिए 24, 22k, 18k गोल्ड रेट

Gold Rate Today: 28 मार्च को फिर से सोने की कीमतों में आया उछाल! जानिए 24k, 22k, 18k गोल्ड रेट क्या है?

Silver Price Today: 25 मार्च को चांदी की कीमतों में जबरदस्त तेजी, ₹20,000 उछाल! जानिए प्रति किलो चांदी का रेट

Gold Rate Today: 26 मार्च को लगातार दूसरे दिन सोने की कीमतों में उछाल! जानिए 24k, 22k, 18k गोल्ड रेट क्या है?

Gold Rate Today: 27 मार्च को फिर से सोने की कीमतों में तेजी! जानिए 24k, 22k, 18k गोल्ड रेट क्या है?

Happy Ram Navami 2026: आज है राम नवमी! इन खास मैसेज से करें अपनों का दिन खास

Silver Price Today: 29 मार्च रविवार को चांदी सस्ता हुआ या महंगा? जानें प्रति किलो चांदी का भाव

Silver Price Today: 28 मार्च को चांदी की कीमतों में उछाल, जानिए प्रति किलो कितना महंगा हुआ चांदी का भाव

Gold Price Today: 29 मार्च को सोना सस्ता हुआ या महंगा? खरीदने से पहले जानें आज का ताजा भाव

Silver Price Today: 26 मार्च को चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी! प्रति किलो चांदी सस्ता हुआ या महंगा?

Gold Silver Price: सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, लेकिन क्यों हर रोज टूट रहा भाव, कितनी रह गई कीमत?



Click it and Unblock the Notifications