Tips & Tricks : माता-पिता के साथ पत्नी-बच्चों की आर्थिक जरूरतें होंगी पूरी, ऐसे करें प्लानिंग

Life management: परिवार में एक पिता की जिम्मेदारी काफी चुनौतियों से भरी होती है। एक पिता पूरे परिवार का लिडर होता है और खासकर बच्चों के लिए रोलमॉडल होता है। बच्चों के सामने आने वाली तमाम चुनौतियों के समय पिता एक ढ़ाल के रुप में काम करते हैं। सबके जिवन में एक ऐसा समय आता है जब आर्थिक जिम्मेदारी के साथ-साथ एक पेरेंट होने की भी जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। जिवन में बेहतर पैरेंटिंग के लिए आपको आज से ही तैयारी करनी होगी। चलिए इसके कुछ पहलुओं की बात करते हैं।

उच्च शिक्षा की तैयारी

उच्च शिक्षा की तैयारी

बच्चे के हायर एजुकेशन के लिए सेविंग करते समय आपकों यह पहले ही तय करना होगा कि जब बच्चा कॉलेज जाने लगेगा तो उसकी उच्च शिक्षा के लिए उस समय के हिसाब से कितना खर्च आएगा। यह राशि बच्चे के पंसद के कोर्स, यूनिवर्सिटी और लोकेशन (देश या विदेश) पर आधारित होगा। अगर आपकी इच्छा है कि आपका बच्चा विदेश में बढ़े तो आपको करीब 4 करोड़ रुपए की बचत आज से ही करनी शुरू कर देनी चाहिए।

शादी के लिए निवेश

शादी के लिए निवेश

बच्चो की शादी में एक बड़ा खर्च आता है। खासकर अगर आपकी बेटी है तो उसके विवाह के लिए आपको बचत पहले ही शुरू करनी होती है। प्रत्येक बाप अपनी बेटी के शादी में किसी भी प्रकार की कमी नहीं होने देना चाहता है। इसलिए अपनी बेटी के शादी के लिए फाइनेंशियल प्लानिंग पहले से ही करना एक बेहतर विकल्प है।

माता-पिता की आर्थिक जिम्मेदारियों का निर्वहन

40 की उम्र के बाद आपके पास जिम्मेदारियों का पहाड़ होता है। आपको अपने बच्चों की जरूरतो के साथ-साथ अपने माता पिता के लिए एक बेटे का भी फर्ज निभाना पड़ता है। माता पिता के लिए दो खर्च सबसे अहम है पहला रेगुलर इनकम और दूसरा मेडिकल।

रेगुलर इनकम की व्यस्था

रेगुलर इनकम की व्यस्था

माता-पिता के लिए रेगुलर इनकम के लिए आप सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम, सीनियर फिक्स्ड डिपॉजिट, प्रधानमंत्री वय वंदना योजना आदी स्कीमों में निवेश कर सकते हैं। कम रिस्क वाले म्यूचुअल फंड में भी निवेश करना एक बेहतर विकल्प है। रेगुलर इनकम होने से माता-पिता को किसी से पैसे मांगने की जरूरत नहीं होगी।

मेडिकल का खर्चा

उम्र बढ़ने के साथ-साथ स्वास्थ्य पर भी खर्च बढ़ जाता है। इसलिए आपको माता-पिता के हेल्थ इंश्योरेंस का कवर बढ़ाना आवश्यक होता है। हेल्थ इंश्योरेंस न होने की स्थिति में आप वित्तीय संकट में फंस सकते हैं। बुजुर्गों का समय समय पर हेल्थ चेक-अप कराना भी एक जिम्मेदारी है। इससे किसी भी तरह के स्वास्थ संबंधित समस्या का पता पहले ही चल जाता है।

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