Safest bank in india: भारत में बैंक पैसे जमा करने के लिए सबसे सुरक्षित जगह माने जाते हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि इस बात में कितना दम है। सबसे पहले तो यह जानना चाहिए कि अगर किसी कारण से फेल हो जाता है तो देश में नियमों के अनुसार उसमें खातेदार का जमा पैसा केवल 5 लाख रुपये तक ही सुरक्षित होता है। इसमें मूल धन और ब्याज दोनों को शामिल किया जाता है। यह नियम देश के हर बैंक पर लागू है।
लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक एक लिस्ट भी जारी करता है, जिसमें उन बैंकों को स्थान दिया जाता है, जो सिस्टम के लिए काफी जरूरी होते हैं। यानी ऐसे बैंकों पर जहां आरबीआई विशेष नजर भी रखता है और समय आने पर इन बैंकों को डूबने भी नहीं देगा। ऐसे फिलहाल देश में केवल तीन ही बैंक हैं। आइये जानते हैं कि यह बैंक कौन से हैं।

भारत मे बैंकों में जमा पैसे को खतरा नहीं के बराबर होता है। लेकिन अगर आप सबसे सुरक्षित बैंको के बारे में जानना चाहते हैं तो उनमें एक सरकारी और दो प्राइवेट बैंक शामिल हैं। भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार, देश के जिन बैंकों के डूबने की गुंजाइश बिल्कुल नहीं है, वो हैं भारतीय स्टेट बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक।
इन तीनों ही बैंकों को D-SIB यानी डोमेस्टिक सिस्टमेटिकली इम्पॉर्टेंट बैंक का दर्जा दिया गया है। इसका मतलब है कि वो बैंक जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए इतने जरूरी होते हैं कि इनका डूबना सरकार कतई बर्दाश्त नहीं कर सकती। इनके डूबने से देश की अर्थव्यवस्था गड़बड़ा सकती है। इनकी बैंक्स के लिए 'टू बिग टू फेल' का भी इस्तेमाल किया जाता है।
बैंकों को D-SIB घोषित करने की व्यवस्था 2008 की आर्थिक मंदी के बाद शुरू हुई थी। तब कई देशों के कई बड़े बैंक डूब गए थे। इसकी वजह से लंबे समय तक आर्थिक संकट की स्थिति बनी रही थी। 2015 से आरबीआई हर साल D-SIB की लिस्ट निकालता है। 2015 और 2016 में केवल स्टेट बैंक और आईसीआईसीआई बैंक इस D-SIB लिस्ट में थे। 2017 से एचडीएफसी बैंक को भी इस लिस्ट में शामिल किया गया है। अगर कोई बैंक D-SIB है, तो रिजर्व बैंक कड़े रेगुलेशंस से ये सुनिश्चित करता है कि वो बैंक मुश्किल से मुश्किल आर्थिक आपातकाल के लिए तैयार रहे।
भारतीय रिजर्व बैंक देश के सभी बैंकों को उनके प्रदर्शन और कस्टमर बेस के आधार पर सिस्टमैटिक इम्पॉर्टेंस अंक देता है। किसी बैंक के D-SIB के तौर पर लिस्ट होने के लिए जरूरी है कि उसकी संपत्ति राष्ट्रीय जीडीपी के 2 फीसदी से ज्यादा हो। बैंक की इम्पॉर्टेंस के आधार पर D-SIB को पांच अलग-अलग कैटेगरी हैं। इसका मतलब सबसे ज्यादा इम्पॉर्टेंट बैंक, वहीं बकेट वन का मतलब है कम इम्पॉर्टेंट बैंक। अभी SBI बकेट थ्री में है, जबकि एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक बकेट वन में हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक D-SIB बैंकों पर कड़ी नजर रखता है। इन बैकों को बाकी बैंकों की तुलना एक बड़ा कैपिटल बफर रखना होता है, ताकि बड़ी इमरजेंसी आने या कोई घाटा होने पर भी उससे निपटा जा सके। कैपिटल बफर के साथ-साथ ऐसे बैंकों को कॉमन इक्विटी टियर 1 कैपिटल नाम का एक एडिशनल फंड भी रखना पड़ता है। आरबीआई की लेटेस्ट गाइडलाइन के मुताबिक, एसबीआई को अपने रिस्क वेटेट एसेट का 0.60 प्रतिशत CET1 कैपिटल के तौर पर रखना ज़रूरी है। वहीं आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक को 0.20 प्रतिशत एडिशनल CET1 के तौर पर रखना जरूरी है।
नोट: जहां तक देश में पैसा सबसे सुरक्षित कहां है, तो वह है पोस्ट ऑफिस। पोस्ट ऑफिस में जमा पैसे की सुरक्षा की गारंटी भारत देती है। ऐसे में पोस्ट ऑफिस में पैसे जमा करने के बाद डूबने की चिंता नहीं होती है।
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