नई दिल्ली, जून 16। 2019 में चीन के 16,000 और भारत के 7,000 अमीर (हाई नेटवर्द इंडिविजुअल्स / एचएनडब्ल्यूआई) लोग अपने-अपने देशों से निकल कर दूसरे देशों में चले गए। इस बात का खुलासा अफ्रशिया बैंक द्वारा की गयी स्टडी में हुआ है। इस स्टडी में केवल 10 लाख डॉलर से 99 लाख डॉलर की कुल संपत्ति वाले अमीरों को शामिल किया गया, जिन्होंने एक नए देश का रुख किया और कम से कम आधा साल वहां बिताया। हालांकि चीन और भारत के इतने करोड़पति इन दोनों देशों के एचएनडब्ल्यूआई के केवल 2-2 प्रतिशत हैं। वहीं रूस और तुर्की से जितने करोड़पति बाहर गए, उनकी अपने देशों के एचएनडब्ल्यूआई में क्रमशः 6 और 8 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है।
इन देशों से भाग गए करोड़पति
चीन से 16000 और भारत से 7000 के अलावा रूस से 5500, हॉन्ग-कॉन्ग से 4200, तुर्की से 2100, यूके से 2000, फ्रांस से 1800, ब्राजील से 1400, सऊदी अरब से 1200 और इंडोनेशिया से 1000 करोड़पतियों ने दूसरे देशों का रुख किया। रिपोर्ट के अनुसार बिजनेस के अवसर, टैक्स और फाइनेंशियल चिंताएं उन कारणों में शामिल रहीं, जिनके कारण इन एचएनडब्ल्यूआई ने अपने-अपने देशों से दूसरे किसी देश में जाने का फैसला किया।
क्या हो सकते हैं अन्य कारण
अनुमान यह भी है कि इन करोड़पतियों का अपने देश से बाहर जाने का फैसला व्यक्तिगत तौर पर लिया गया भी हो सकता है। बेहतर हेल्थकेयर सिस्टम, बेहतर शिक्षा सिस्टम, सेफ्टी, बेहतर स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग और एक दमनकारी शासन से बचने जैसे भी वो कारण हो सकते हैं, जिनके चलते एचएनडब्ल्यूआई ने एक नया घर चुना।
किन देशों में गए ये करोड़पति
अब सवाल यह भी उठता है कि आखिर वे कौन से देश हैं, जिनमें इन करोड़पतियों ने जाने का फैसला किया। तो बता दें कि इन देशों में 12,000 करोड़पतियों का स्वागत करने वाला ऑस्ट्रेलिया पहले नंबर पर रहा। 2019 में इस देश ने सबसे अधिक एचएनडब्ल्यूआई को आकर्षित किया। अमेरिका और स्विट्जरलैंड क्रमश: 10,800 और 4,000 एचएनडब्ल्यूआई के साथ लिस्ट में दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे।
एचएनडब्ल्यूआई ने इन देशों को भी चुना
पुर्तगाल और ग्रीस भी एचएनडब्ल्यूआई को आकर्षित करने वाले शीर्ष 10 देशों में शामिल रहे। अपने धूप वाले मौसम के अलावा दोनों देश निवेशक कार्यक्रम चलाते हैं जो यूरोपीयन यूनियन रेसिडेंसी और नागरिकता तक एक्सेस प्रदान करते हैं।
कौन सी वीजा चुनी
केवल 30 प्रतिशत एचएनडब्ल्यूआई ने निवेशक वीजा का उपयोग करके दूसरे देशों का रुख किया। जबकि अधिकतर वर्क वीजा, फैमिली वीजा या पूर्वजों के माध्यम से दूसरा पासपोर्ट प्राप्त करने जैसे दूसरे तरीके अपनाते हैं।
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