नयी दिल्ली। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के अधिकारियों की उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया है जिसमें एक करोड़ रुपये से अधिक आय वालों पर 40 प्रतिशत इनकम टैक्स लगाने का सुझाव दिया गया था। एक आधिकारिक बयान में सीबीडीटी ने कहा है कि कोरोनावायरस स्थिति से निपटने के लिए कुछ आईआरएस अधिकारियों के सुझावों के बारे में सोशल मीडिया पर कुछ रिपोर्ट चल रही है। सीबीडीटी ने साफ किया कि आईआरएस एसोसिएशन या इन अधिकारियों को इस तरह की रिपोर्ट तैयार करने के लिए कभी नहीं कहा। सीबीडीटी ने आगे कहा कि आधिकारिक मामलों पर अपने व्यक्तिगत विचारों और सुझावों को पब्लिक के सामने रखने से पहले अधिकारियों ने कोई अनुमति नहीं मांगी। सीबीडीटी ने आईआरएस अधिकारियों के इस सुझाव को आचरण नियमों के खिलाफ बताया है।

क्या थे आईआरएस अधिकारियों का प्रस्ताव
आईआरएस के 50 अधिकारियों की तरफ से सुझावों की एक प्रस्तावित रिपोर्ट में कहा गया था कि सीमित समय अवधि के लिए सालाना एक करोड़ रुपये से अधिक आय वालों के लिए इनकम टैक्स रेट बढ़ा कर 40 प्रतिशत की जाए। रिपोर्ट में 5 करोड़ रुपये की शुद्ध संपत्ति वाले व्यक्तियों के लिए वेल्थ टैक्स को फिर से लागू करने और 10 लाख रुपये से अधिक की टैक्सेबल इनकम पर एक बार 4 फीसदी सेस लगाने का प्रस्ताव रखा गया। 40 फीसदी टैक्स को सही ठहराते हुए, रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिकतर उच्च-आय वाले लोगों के पास अभी भी घर से काम करने की सहूलियत है और अमीर लोग अपनी दौलत के सहारे इस संकट से निकल सकते हैं।
विरासत टैक्स को फिर से लाए जाने की वकालत
आईआरएस अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में विरासत टैक्स, जिसे 1985 में खत्म कर दिया गया था, को फिर से लाए जाने की वकालत की है ताकि पूंजी की एकाग्रता को कम किया जा सके और टैक्स आधार को बढ़ाने के साथ ही राजस्व को बढ़ाया जा सके। रिपोर्ट में गरीबों के लिए एक खास प्रस्ताव भी रखा गया। आईआरएस की तरफ से कई गई सिफारिशों में गरीबों को आर्थिक मदद देने के लिए एक खास सुझाव दिया गया है। आईआरएस ने अपने सुझावों में कहा है कि गरीबों को हर महीने 5000 रुपये दिये जाएं, जो सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर किए जाने चाहिए।


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