नयी दिल्ली। आपने पिछले कुछ सालों में पराली शब्द बहुत बार सुना होगा। पंजाब और हरियाणा के किसान हर साल पराली जलाते हैं, जिससे दिल्ली सहित आस-पास के शहरों में प्रदूषण बहुत बढ़ जाता है। इस साल भी पराली पर खूब घमासान मचा। पराली का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। मगर इसका कोई भी जटिल समाधान अभी तक नहीं निकला। पर अब हरियाणा के एक किसान ने पराली से न सिर्फ बिना जलाए निपटने बल्कि कमाने का भी रास्ता निकाल लिया। इस किसान ने पराली से लाख-दो-लाख नहीं बल्कि करोड़ों रु की कमाई कर डाली। साथ ही दूसरों को भी मुनाफा कराया। आइए जानते हैं इस किसान की कहानी।
ऑस्ट्रेलिया से नई सोच के साथ लौटे
हरियाणा के फर्शमाजरा के वीरेंद्र यादव ऑस्ट्रेलिया से लौटे हैं। वे प्रोग्रेसिव खेती को बढ़ावा दे रहे हैं। इसी कड़ी में उन्होंने पराली से निपटने का भी रास्ता निकाल लिया। पराली से निपटने के लिए उन्होंने वीरेंद्र ने पराली की स्ट्रा बेलर मशीन खरीदी। इस मशीन को खरीदने के लिए उनकी कृषि विभाग ने भी आर्थिक मदद की। उन्होंने पराली के गट्टे तैयार किए और उन्हें एग्रो एनर्जी प्लांट को बेचा।
पीएम मोदी ने की तारीफ
वीरेंद्र की कहानी किसी और ने नहीं बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने विशेष रेडियो प्रोग्राम मन की बात में की। उन्होंने 29 नवंबर को मन की बात के 71वें एपिसोड में वीरेंद्र की पूरी कहानी बताई। पीएम ने बताया कि वीरेंद्र ऑस्ट्रेलिया में रहते थे और 2 साल पहले ही हरियाणा के कैशल वापस आए हैं। उन्होंने पराली का अच्छा सॉल्यूशन निकाला। पीएम मोदी ने वीरेंद्र की कमाई का भी जिक्र किया।
पराली से कितना कमाया
उन्होंने सिर्फ 2 साल के अंदर 1.5 करोड़ रु का कारोबार किया है। अच्छी बात ये है कि इसमें से करीब 50 लाख रु उनके मुनाफे के हैं। यानी 2 साल मे उन्होंने एक ऐसी चीज से 50 लाख रु का शुद्ध मुनाफा कमाया है जिसे बेकार समझा जाता है। वीरेंद्र दूसरे किसानों से भी पराली लेते हैं और उन्हें भी मुनाफे का हिस्सा देते हैं। पीएम मोदी ने कृषि की पढ़ाई कर रहे छात्रों से किसानों को आधुनिक खेती के बारे में जागरुक करने का आग्रह किया।
बहुत खुश हुए वीरेंद्र
पीएम मोदी द्वारा मन की बात जैसे प्रोग्राम में अपना जिक्र किए जाने पर वीरेंद्र काफी हुए। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि पराली का सही से निपटान करने पर ये इनकम का अच्छा खासा माध्यम बन सकता है। इससे पर्यावरण को भी काफी फायदा हो सकता है। एक अधिकारी के अनुसार जिसे में फसल के बचे हुए अवशेषों के निपटान के लिए किसानों को सही जानकारी और उन्हें जागरुक किया जा रहा है।
क्या होती है पराली
धान की फसल जब काट ली जाती है तो उसे कुछ हिस्सा बचा रह जाता है। उनकी जड़ें जमीन में होती हैं। किसान पकी हुई फसल का केवल ऊपरी हिस्सा काटते हैं, जो कि काम का होता है। बाकी हिस्सा बेकार होता है, जो जमीन में धंसा रह जाता है। अब अगली फसल के लिए किसान को खेत खाली चाहिए। इसलिए वे दिखने में सूखी घास जैसी पराली को जला देते हैं। पराली ज्यादा होती है, इसलिए किसान समय बचाने के लिए मशीनों से धान कटवाते है। अब मशीन धान का उपरी हिस्सा तो काट देती है, पर नीचे का हिस्सा बचा रह जाता है।
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