नई दिल्ली, अगस्त 16। कई लोग जीवन में सफल इसी वजह से नहीं हो पाते क्योंकि वे अपने लक्ष्य को छोटा रखते है और जल्दी से हार मान जाते है। यह कहानी एक ऐसे व्यक्ति की है जिसने जीवन को बहुत सरलता से जिया और अपने लक्ष्यों के प्रति अडिग रहा और बड़े सपने देखे और उसको पाने के लिए उतनी ही मेहनत की। तेरह वर्ष की उम्र में यह लड़का एक मैकेनिक का काम करता था और आज इसका नाम मार्क जुकरबर्ग जैसे बड़े नामों में शामिल है।
तेरह वर्ष की उम्र में मैकेनिक का काम किया
चेन्नई में जन्में अरुण पुदुर की कहानी सभी को प्रेरणा देती है। अरुण में पिता एक छायाकार थे और माता एक हाउस वाइफ थी। अरुण का बचपन बेहद साधारण बीता है। वे याद करते है कि शुक्रवार को उनके पिता की कमाई तय हुई थी। क्योंकि इसी दिन उनके पिता की फिल्म रिलीज हुई थी। जब वह तेरह वर्ष के थे उनके पिता से पास के एक गैराज में काम करने की अनुमति मांगी और वह उन्होंने मैकेनिक को अपने साथ काम करते देख बाइक बनाना सीखा।
8 हजार से शुरू की गैराज 1 करोड़ में बेचा
एक दिन अचानक गैरेज का मालिक गैरेज छोड़ कर चला गया अरुण के अपनी मां से कुछ हजार रुपए उधार मांगे और गैरेज खरीद लिया और कम ही समय में सारा काम भी सीख लिया था। वो 15 मिनट में वाहन का इंजन खोल देता था। उनका गैरेज जल्द ही काफी फैमस हो गया। अरुण को इस बिजनेस में मजा आने लगा था। मगर जब उनके पिता ने उन्हें पढ़ाई में ध्यान देने के लिए कहा तब उन्होंने गैरेज को एक स्थानीय कंपनी को बेच दिया उन्होंने अपनी मां से 8 हजार रुपए लेकर गैरेज शुरू किया था और अब 1 करोड़ रूपये में बेच कर सारे पैसे मां को दे दिए।
26 वर्ष की उम्र में अरबपति
अरुण में आगे काम कुत्तों को पालना और उन्हें अच्छे कुत्तों के प्रजनन से लिए बेचना था। उन्हे एक पिल्ले के 20 हजार रूपये मिलते थे। उसके बाद उन्होंने उनके पिता को रिटायर होने के लिए कहा। कुछ समय बाद अरुण ने सेलफ्रेम नाम से एक कंपनी शुरू की। यह कंपनी सबसे प्रसिद्ध वर्ड प्रोसेसर बनाती है। आज, अरुण की कंपनी सेलफ्रेम दुनिया में अपने प्रोडक्ट में दूसरा सबसे बड़ा विक्रेता है। अरुण 21 वर्ष की उम्र में करोड़ पति और 26 वर्ष की उम्र में अरब पति बन गए।


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