
Bank Privatisation : भारत में निजीकरण पर तेज गति से कार्य किया जा रहा है। निजीकरण को लेकर सरकार बहुत सक्रिय होती दिख रही हैं। निजीकरण की इसी कड़ी में बैंकिंग सेक्टर को निजी हाथों में देने की तैयारी बहुत तेजी से हो रही हैं। बताया जा रहा है कि अगर बैंकिंग सेक्टर प्राइवेट हाथों में जाता हैं, तो फिर बैंकिंग व्यवस्था में काफी बदलाव देखने को मिलेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की तरफ से गत वर्ष के बजट में इसकी घोषणा की गई थी।
सरकार की हिस्सेदारी इतनी हैं इस बैंक में
अगर हम आईडीबीआई बैंक में सरकार की हिस्सेदारी की बात करते हैं, तो सरकार की आईडीबीआई बैंक में 45.48 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि एलआईसी की हिस्सेदारी की बात करते हैं, तो एलआईसी में सरकार की 49.24 प्रतिशत हिस्सेदारी है। बताया जा रहा है। कि सरकार और एलआईसी आईडीबीआई बैंक में कुछ हिस्सेदारी बेचेगी और फिर जो प्रबंधन नियंत्रण हैं। वो भी खरीददार को सौंप दिया जाएगा। इसके तहत जो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी को खरीदने की मंजूरी दे सकती हैं। इस कवायद के दौरान केंद्र सरकार और एलआईसी क्रमश: 30.48 प्रतिशत और 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी को बेचेगा।
कई सरकारी कंपनी निजीकरण के लिस्ट में
निजीकरण के लिए सरकार की तरफ से बहुत सारी कंपनीयो की लिस्ट तैयार की गई है। इसके तहत आधा दर्जन से ज्यादा सरकारी कंपनियां हैं उन कंपनीयों की सूची तैयार की गई है। इन कंपनीयों में विजाग स्टील,
शिपिंग कॉर्प, कॉनकोर, आईडीबीआई बैंक, एनएमडीसी का नगरनार स्टील प्लांट और एचएलएल लाइफकेयर शामिल हैं। इतना ही नहीं, सरकार की तरफ से करंट वित्त वर्ष 2022-23 में केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (सीपीएसई) के 24 हजार करोड़ रु से अधिक रु को इकट्ठा किया हैं।
बोलियां दाखिल करने की डेडलाइन में 1 महीने आगे बढ़ाए जाने की उम्मीद है
सरकारी से प्राइवेट हुए जो आईडीबीआई बैंक हैं। इस आईडीबीआई बैंक की प्राइवेटाइजेशन के लिए जो आरंभिक बोलियां हैं उसको दाखिल करे की डेडलाइन को लगभग एक महीने आगे बढ़ाने जाने की उम्मीद हैं। मीडिया रिपोर्टस् के अनुसार, एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट जमा करने की आखिरी तारीख 16 दिसंबर है। जिसे जनवरी तक बढ़ाए जाने की उम्मीद है।


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