इस पुलिसवाले ने आलू को बना दिया सोना, हर साल कमा रहा 3.3 करोड़ रु

नयी दिल्ली। हमारे देश में किसानों की हालत से सभी अच्छी तरह वाकिफ हैं। किसानों को अक्सर अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरना पड़ता है। मगर कुछ किसान ऐसे भी होते हैं जो किसी स्पेशल खेती से एक नया ही कारनामा करके दिखाते हैं। इससे उन्हें कमाई भी तगड़ी होती है। आज हम जिस किसान की बात करने जा रहे हैं उसने भी कुछ ऐसा ही किया है। खास बात ये है कि ये किसान पहले पुलिसवाले थे। रिटायर होने के बाद इनके दिमाग में खेती करने की आई। इन्होंने किसी अनोखी चीज की खेती नहीं की, बल्कि आलू ही उगाया। पर एक ऐसा अजूबा हुआ कि उनकी सालाना कमाई 3.3 करोड़ रु तक पहुंच गई। ये कहानी है गुजरात के एक छोटे से गांव डांगिया के पार्थीभाई जेठाभाई चौधरी की, जिनकी गिनती आज देश के सबसे बड़े आलू किसानों में होती है।

बना डाला विश्व रिकॉर्ड

बना डाला विश्व रिकॉर्ड

वनइंडिया की रिपोर्ट के अनुसार सालाना कारोबार 3.3 करोड़ रु तक पहुंचाने के अलावा गुजरात पुलिस के पूर्व डीएसपी पार्थीभाई ने आलू के प्रोडक्शन में अपने नाम वर्ल्ड रिकॉर्ड भी दर्ज करा लिया है। पार्थीभाई ने पुलिस महकमे में एसआई पद से शुरुआत की थी और आखिर में वो 2015 में डीएसपी रहते हुए रिटायर हुए। उनके 4 भाई और भी हैं। पार्थीभाई के पिता भी किसान ही थे। भाइयों के बीच जमीन का बंटवारा होने के बाद उन्होंने भी खेती करने की सोची।

प्रोग्रेसिव तरीका अपनाया

प्रोग्रेसिव तरीका अपनाया

पार्थीभाई ने सिम्पल खेती के बजाय प्रोगेसिव तरीका अपनाया। इसके लिए वे राज्य के दूसरे प्रोग्रेसिव यानी प्रगतिशील किसानों से मिले और उनसे खेती के आधुनिक तरीके सीखे। आखिर में उनकी सोच आलू पर रुक गई। उन्होंने पुलिस की नौकरी के साथ ही 2004 में आलू की खेती करना शुरू की। शुरुआत में उनका काम 5 एकड़ तक सीमित था। मगर धीरे-धीरे वे जमीन बढ़ाते रहे जो आज 87 एकड़ पहुंच गई है। तकनीक में उन्होंने काफी जानकारी हासिल की। आज स्थिति ये है कि देश भर के किसान एक पूर्व पुलिसवाले से खेती के नये तरीके सीखने आते हैं।

16 परिवारों को दे रहे रोजगार

16 परिवारों को दे रहे रोजगार

पार्थीभाई आज खुद अच्छी कमाई के अलावा 16 परिवारों को रोजगार दे रहे हैं। उनकी खेती की जमीन पर 8 नलकूप हैं, जिन्हें स्प्रिंकलर सिस्टम से जोड़ा गया है। आलू की बुवाई नवंबर में होती है। मार्च के मध्य तक आलू उग आते हैं, जिन्हें तभी निकाल लिया जाता है। फिर अप्रैल से नवंबर तक वे कई अन्य चीजें भी उगाते हैं जिनमें बाजरा, तरबूज और मूंगफली शामिल हैं। पार्थीभाई का गांव बनासकांठा जिले में आता है, जो इस समय आलू के प्रोडक्शन के मामले में काफी आगे है। यहां आलू की खेती करने वाले किसानों की संख्या 1 लाख है।

कौन खरीदता है आलू

कौन खरीदता है आलू

बनासकांठा जिले का आलू कई बड़ी कंपनियां खरीदती हैं, जिनमें मैक्केन फूड्स इंडिया यूनिट, हाइफन फूड यूनिट और बालाजी वेफर्स राजकोट शामिल हैं। इन आलूओं का इस्तेमाल चिप्स आदि बनाने में किया जाता है। यहां खाने में इस्तेमाल होने वाले आलू भी उगाए जाते हैं, जो टेबल क्वालिटी के नाम से प्रसिद्ध हैं। पार्थीभाई ने आलू की बढ़िया खेती के लिए नाइट्रोजन, पोटास और दूसरे कीटनाशकों की पूरी जानकारी हासिल की। तब जाकर उन्हें इतनी महारत हासिल हुई।

कैसे बना वर्ल्ड रिकॉर्ड

कैसे बना वर्ल्ड रिकॉर्ड

पूरी दुनिया में प्रति हैक्टेयर में सबसे ज्यादा आलू उगाने वाले व्यक्ति पार्थीभाई ही हैं। उन्होंने 2011-12 में प्रति हैक्टेयर में 87 मैट्रिक टन आलू का उत्पादन किया था, जो वर्ल्ड रिकॉर्ड है। इससे पहले ये रिकॉर्ड नीदरलैंड के एक किसान के नाम था। उस किसान ने प्रति हैक्टेयर 54 मैट्रिक टन आलू उगाया था।

2.70 करोड़ रु का मुनाफा

2.70 करोड़ रु का मुनाफा

अब पार्थीभाई 15 से 17 टन आलू प्रति एकड़ में उगा पाते हैं। उनका आलू 22 रु प्रति किलो के रेट पर बिकता है। पार्थीभाई का सालाना उत्पादन 15 लाख किलो है। इस लिहाज से उनका सालाना कारोबार हुआ 3.3 करोड़ रु। इसमें 50-60 लाख रु खेती में खर्च होते हैं। यानी बाकी 2.70 करोड़ रु तक उनका नेट प्रोफिट है।

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