नयी दिल्ली। भारत में उपभोक्ता खर्च, जो अर्थव्यवस्था की आधारशिला है, में आई गिरावट के निकट भविष्य में फिर से पटरी पर लौटने की बहुत कम संभावना है। लॉकडाउन में ढील के चलते धीरे-धीरे अर्थव्यवस्था खोली जा रही है, मगर हाल के हफ्तों में खरीदार बाजारों से काफी हद तक गायब रहे हैं। बढ़ती बेरोजगाी, लोगों पर कर्ज का बढ़ना और सोशल डिस्टेंसिंग खरीदारों को बाजारों से दूर रखे हुए हैं। भारत की अर्थव्यवस्था में लगभग 60 फीसदी योगदान की खपत का है। खपत में गिरावट से एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। जानकार कहते हैं कि उपभोक्ताओं से सेंटिमेंट कमजोर रहने से मांग में सुधार धीमी रफ्तार से होगा। सरकार कम टैक्स कलेक्शन की भरपाई के लिए खर्च में कटौती करने लगी है और कारोबारी कैश बचा कर नए निवेश टाल सकते हैं।
रिटेल स्टोर्स में ग्राहकों की संख्या घटी
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार ShopperTrac के आंकड़ों के मुताबिक भारत में खुदरा स्टोरों पर जाने वाले ग्राहकों की संख्या में भारी गिरावट आई है। मासिक आधार पर इसमें पिछले महीने लगभग 30 फीसदी की गिरावट आई, जबकि अप्रैल में 90 फीसदी की कमी दर्ज की गई थी जब लॉकडाउन चरम पर था। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार मार्च में क्रेडिट कार्ड लेनदेन की कुल संख्या भी तेजी से घट गई। लॉकडाउन का ऐलान मार्च के अंतिम सप्ताह में किया गया था, लेकिन उसकी घोषणा से पहले ही इनमें गिरावट आने लगी थी।
क्रेडिट कार्ड पर खर्च हुआ कम
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार ग्राहक अपने क्रेडिट कार्ड पर भी कम खर्च कर रहे हैं। फरवरी में 62,500 करोड़ रुपये से घट कर मार्च में क्रेडिट कार्ड से खर्च घट कर लगभग 50,700 करोड़ रुपये रह गया। आरबीआई के ही मुताबिक वर्तमान स्थिति सूचकांक के रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिरने से मई में कंज्यूमर कॉन्फिडेंस भी गिर गया। भविष्य में भी खर्च में बढ़ोतरी होना बहुत आशाजनक नहीं है। ताजा सर्वे के अनुसार उपभोक्ता भावना सर्वेक्षण से पता चलता है कि लोगों में एक साल के लिहाज से खर्च के मामले में निराशा है।
लोग कर रहे अधिक बचत
आरबीआई के एक रिपोर्ट "Quarterly Estimates of Households" के अनुसार कि कई अध्ययनों से पता चलता है कि लोग मंदी और इनकम की अनिश्चितता के दौरान अधिक बचत कर रहे हैं। आरबीआई ने उम्मीद जताई है कि मंदी और इनकम अनिश्चितता के चलते लोगों की बचत में बढ़ोतरी होगी। आगे लॉकडाउन के कारण खपत में तेज गिरावट के के चलते 2020-21 की पहली तिमाही में परिवारों की शुद्ध वित्तीय संपत्ति में बढ़ोतरी की भी संभावना है।
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