यस बैंक पर आए संकट का सबसे ज्यादा असर बैंक के खाताधारकों को हो रहा है। डूबने की कगार पर पहुंच चुके यस बैंक ने खाताधारकों को कैश की किल्लत का सामना कर ना पड़ रहा है।
नई दिल्ली: यस बैंक पर आए संकट का सबसे ज्यादा असर बैंक के खाताधारकों को हो रहा है। डूबने की कगार पर पहुंच चुके यस बैंक ने खाताधारकों को कैश की किल्लत का सामना कर ना पड़ रहा है। वहीं आरबीआई भी धीरे-धीरे उन्हें राहत दे रही है। बता दें कि यस बैंक में संकट के लिए उन कंपनियों को जिम्मेदार माना जा रहा है, जो कर्ज चुकाने में डिफॉल्टर साबित हुई हैं। अनिल अंबानी ग्रुप, जेट एयरवेज, कॉफी कैफे डे से लेकर जेट एयरवेज तक ऐसी तमाम कंपनियां हैं, जिन पर यस बैंक के हजारों करो़ड़ रुपये बकाया हैं। हालांकि ऐसी कई मुनाफे वाली कंपनियां भी हैं, जो बिजनेस में प्रॉफिट के साथ ही कर्ज में भी आगे हैं। तो चलिए आज हम आपको बता दें कि कर्ज के मामले में कौन हैं देश की टॉप 10 कंपनियां
पावर फाइनेंस कारपोरेशन
सबसे पहले पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन के बारें में बता दें। सरकारी क्षेत्र की इस कंपनी पर फाइनेंशियल ईयर 2019 में 5,25,359 करोड़ रुपये का भारी भरकम कर्ज है। हालांकि डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक सेक्टर इंटरप्राइजेज के एक सर्वे के मुताबिक मुनाफा कमाने के मामले में यह 8वें नंबर की सरकारी कंपनी है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड
मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड जो कि टेलीकॉम सेक्टर, तेल समेत कई अहम क्षेत्रों में दखल रखने वाले देश के सबसे अमीर कॉरपोरेट समूह पर 2.87 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। मुकेश अंबानी ने समूह की 42वीं जनरल मीटिंग में कहा था कि वह ग्रुप को पूरी तरह से कर्ज मुक्त बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं। हालांकि अब तक रिलायंस समूह इस दिशा में आगे बढ़ता नहीं दिखा है।
एचडीएफसी
बात करें एचडीएफसी कि जो कि तीसरे नंबर पर है। बैंकिंग, इंश्योरेंस, रियल्टी समेत कई सेक्टर्स में दखल रखने वाली कंपनी एचडीएफसी पर 2,79,683 करोड़ रुपये का कर्ज है। कंपनी देश में कर्ज के मामले में तीसरे नंबर पर है। 2015 में कंपनी पर 2.17 लाख करोड़ रुपये का कर्ज था, जिसमें अब तक 28 फीसदी का इजाफा हुआ है।
सरकारी कंपनी आरईसी चौथे पर
वहीं 2 लाख 44 हजार करोड़ रुपये के कर्ज के साथ सरकारी विद्युत कंपनी रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन यानी आरईसी चौथे नंबर पर है। इस कंपनी में 52 फीसदी हिस्सेदारी पीएफसी यानी पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन की ही है, जो कर्ज के मामले में पहले नंबर पर है। बीते 4 सालों में कंपनी के कर्ज में 61 फीसदी से ज्यादा का इजाफा हुआ है।
एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस
लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन की सहायक एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस पर 1.68 लाख रुपये का कर्ज है। यह कंपनी कर्ज के मामले में देश में 5वें नंबर पर है। देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी एलआईसी की इसमें 40 फीसदी के करीब हिस्सेदारी है। बीते 4 सालों में इस कंपनी पर कर्ज का बोझ 75 फीसदी बढ़ गया है।
एनटीपीसी पर भी भारी कर्ज
एनटीपीसी देश की दिग्गज विद्युत उत्पादन कंपनी की बात करें तो कंपनी पर 1 लाख 61 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है। फाइनेंशियल ईयर 2019 में कंपनी ने 11,961 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया था। 1975 में स्थापित हुई यह कंपनी देश में विद्युत उत्पादन के मामले में शीर्ष कंपनियों में से एक है।
पावर ग्रिड कॉरपोरेशन पर भी कर्ज
सरकारी क्षेत्र की ही एक और महारत्न कंपनी पावर ग्रिड कॉरपोरेशन 1.46 लाख करोड़ रुपये के कर्ज के साथ 7वें नंबर पर है। 1989 में स्थापित हुई इस कंपनी में सरकार की 54 फीसदी के करीब हिस्सेदारी है। हालांकि यह कंपनी भी मुनाफे वाली है और 2019 में 12,596 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हासिल किया था।
वोडाफोन आइडिया पर कर्ज भी और घाटा भी
सबसे ज्यादा चर्चा होने वाली टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन आइडिया पर 1.26 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। यह फिलहाल कर्ज के मामले में 8वें नंबर पर है। हाल ही में सरकार के बकाये एजीआर को चुकाने के लिए चर्चा में रही वोडाफोन ने हाल ही में भारत से कारोबार समेटने की भी बात कही थी। 2019 में इस कंपनी को 14,800 करोड़ का नेट लॉस हुआ था। हालांकि माना जा रहा है कि सरकार की ओर से बेलआउट पैकेज जारी किए जाने के बाद कंपनी की सेहत में कुछ सुधार आ सकता है।
लार्सन एंड ट्रुबो भी कर्ज में
इंजीनियरिंग, कंस्ट्रक्शन से लेकर आईटी सेक्टर तक में काम करने वाली लार्सन एंड ट्रुबो पर 1 लाख 25 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है। 1938 में बनी इस कंपनी को 2019 में 10,237 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट हुआ था।
एयरटेल पर कर्ज का संकट
इसके साथ ही रिलायंस जियो के आने के बाद से ही संकट में चल रही भारती एयरटेल पर 1,25,428 करोड़ रुपये का कर्ज है। हाल ही में सरकार के एजीआर बकाये को लेकर भी कंपनी चर्चा में थी। हालांकि कंपनी ने कहा कि उसने 13,000 करोड़ रुपये के एजीआर बकाये को अदा कर दिया है। कंपनी को 2019 में 1,332 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट हुआ था।


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