नई दिल्ली, जुलाई 9। भारत के नीति निर्माता और उपभोक्ता वस्तुओं (कमोडिटीज), विशेष रूप से पाम ऑयल, की कीमतों में भारी गिरावट को सपोर्ट कर रहे हैं। इससे कुछ महीनों के लिए आश्चर्यजनक रूप से खाद्य मुद्रास्फीति कम रह सकती है। भारत में खाना पकाने का तेल व्यावहारिक रूप से हर मुख्य व्यंजन बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। बढ़ती आपूर्ति के कारण ये कई महीनों के अपने सबसे निचले स्तर पर गिर गया है। इसी के मद्देनजर निवेशकों भी इससे बचने लगे हैं। इससे मुद्रास्फीति के तेजी से बढ़ने की चिंताओं पर विराम लग सकता है।
खाद्य तेलों का दुनिया का सबसे बड़ा खरीदार
भारत खाद्य तेलों का दुनिया का सबसे बड़ा खरीदार है और अपनी लगभग 60 फीसदी जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। पाम तेल, जो रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के बाद तेजी से महंगा हुआ था और इंडोनेशिया ने अस्थायी रूप से इसके निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था, अप्रैल के रिकॉर्ड बंद स्तर से 40 फीसदी गिर गया है। जानकारों का मानना है कि खाद्य तेल की कीमतों में गिरावट का असर जून में कुछ हद तक दिखना शुरू हो जाएगा, जिसका पूरा असर बाद में होगा।
महंगाई दर आरबीआई के टार्गेट से अधिक
मुद्रास्फीति वर्ष की शुरुआत से भारतीय रिजर्व बैंक के 6 फीसदी ऊपरी टोलरेंस लेवल से ऊपर रही है। इसने आरबीआई को पिछले दो महीनों में दरों में 90 आधार अंकों की वृद्धि करने के लिए मजबूर किया है। मोदी सरकार द्वारा मुद्रास्फीति को कम करने के अन्य उपायों में घरेलू आपूर्ति की सुरक्षा के लिए गेहूं और चीनी पर निर्यात प्रतिबंध लगाया जाना शामिल हैं।
खाद्य तेलों और पेट्रोलियम उत्पादों पर टैक्स कटौती
अधिकारियों ने कुछ खाद्य तेलों और पेट्रोलियम उत्पादों पर भी करों में कटौती की है, जिससे खाद्य कीमतों को कम करने में मदद मिली है, जो भारत के उपभोक्ता मूल्य बास्केट का लगभग आधा हिस्सा है। बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों में मंदी की आशंका से कमोडिटी बाजार में सेंटीमेंट में कमजोरी आई है। कच्चे तेल में मार्च के हाई लेवल के बाद से लगभग 20% की गिरावट आई है। वहीं अप्रैल के अंत से सोयाबीन तेल की कीमतें एक तिहाई कम हुई हैं, जबकि गेहूं और मकई में भी गिरावट आई है।
इंटरनेशनल बाजार का सहारा
अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट के साथ घरेलू लागत भी गिरने लगी है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले महीने भारत में खाद्य तेलों की औसत खुदरा कीमतों में 8% की गिरावट आई है। घरेलू इंडस्ट्री कीमतों को और कम करने को तैयार है क्योंकि वैश्विक बाजारों में तेजी से गिरावट आई है। पंप डीजल की कीमतों में भी 7% से अधिक की गिरावट आई है।
ये है राहत की खबर
पाम तेल, गेहूं, चीनी और चावल में तेज गिरावट मुद्रास्फीति के लिए अच्छी खबर है। शॉर्ट टर्म में, खाद्य मूल्य मुद्रास्फीति कुछ महीनों तक कम रह सकती है। हालांकि, कीमतों में गिरावट आरबीआई को मुद्रास्फीति के खिलाफ अपनी लड़ाई को कम करने के लिए मनाने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती है क्योंकि जोखिम बना रहता है। जानकारों का मानना है कि कमजोर रुपये पर भी विचार करने की जरूरत है क्योंकि इससे कमोडिटी की कम कीमतों से होने वाले फायदे में कमी आ सकती है।
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