UP: एक दशक में खेती की हिस्सेदारी 7.2 से बढ़कर 9.2 फीसदी हुई
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UP: राज्य के किसानों के लिए सब्जियों और फलों की खेती संभावनाओं की खेती बन रही है। वर्ष 2023 की कृषि वानिकी रिपोर्ट में इसकी पुष्टि भी हो रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फलों और सब्जियों खेती में एक दशक में राज्य की हिस्सेदारी 7.2 से बढ़कर 9.2 फीसदी हो गई है।

इसी क्रम में इनसे प्राप्त ग्रास वैल्यू आउटपुट (जीवीजी) की बात करें, तो फिर यह भी 20.6 हजार करोड़ रु से बढ़कर 38,000 करोड़ रु हो गया।

दरअसल, मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कृषि विविधीकरण एवं मार्केट की डिमांड के अनुरूप खेती की अपील, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस एवं मिनी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में गुणवत्तापूर्ण पौधों का उत्पादन कर किसानों को न्यूनतम रेट में देना, संरक्षित तापमान एवं नमी नियंत्रित कर संरक्षित खेती को बढ़ावा एवं मंडियों के आधुनिकरण आदि का बेहद ही जरूरी योगदान है।

उल्लेखनीय है कि फल एवं सब्जियों की खेती और इनका प्रसंस्करण व्यापक संभावनाओं का क्षेत्र है। मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार इन्हीं संभावनाओं के मद्देनजर अपने पहले कार्यकाल से ही लगातार इनकी खेती को हर संभव प्रोत्साहन दे रही है।

लगभग वर्ष भर पहले लगातार दूसरी बार राज्य में मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद ही आने वाले 5 वर्षों के लिए इनकी खेती के क्षेत्र फल का विस्तार, उपज में वृद्धि और प्रसंस्करण के बाबत महत्वाकांक्षी लक्ष्य भी विभाग के सामने रख दिया गया था। कार्य भी उसी के अनुरूप हो रहा है।

लक्ष्य के अनुसार, वर्ष 2027 तक बागवानी फसलों का क्षेत्रफल 11.6 से बढ़ाकर 16 प्रतिशत किया जाना है। जबकि खाद्य प्रसंस्करण 6 से बढ़ाकर 20 प्रतिशत किया जाना है।

इसके लिए लगने वाली जो प्रसंस्करण इकाइ है। इसके लिए बड़े स्तर पर कच्चे माल के रूप में फलों एवं सब्जियों की आवश्यकता होगी।

हॉर्टिकल्चर में जो तय लक्ष्य हैं। इस लक्ष्य को प्राप्त करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका गुणवत्तापूर्ण प्लांटिंग मैटिरियल की है। सरकार इसके लिए तय समय अवधि में हर जिले में एक्सीलेंस सेंटर, मिनी एक्सीलेंस सेंटर या हाईटेक नर्सरी की स्थापना करेगी।

इस रिगार्डिंग कार्य भी जारी है। मसलन सहारनपुर, चंदौली, लखनऊ, हापुड़, कौशाम्बी और कुशीनगर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस निर्माणाधीन है। इसी के साथ मऊ, फतेहपुर, बहराइच, अम्बेडकरनगर, रामपुर, अलीगढ़ और हापुड़ में मिनी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस क्रियाशील हैं।

आगरा, संतकबीरनगर, सोनभद्र, मुरादाबाद, लखनऊ, चंदौली, महोबा, झांसी, बलरामपुर, बदायूं, बाराबंकी, गोंडा, फिरोजाबाद, शामली और मीरजापुर में भी मिनी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस / हाईटेक नर्सरी निर्माणाधीन हैं। इस तरह की वर्ष 2027 तक बुनियादी संरचना है जिले में होगी।

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