Inflation: सितंबर में मुद्रास्फिती 7.41 के हाई स्तर पर रही है। विशेष रूप से खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमते मुद्रास्फिती के स्तर को कम नहीं होने दे रही हैं। वास्तव में, खाद्य पदार्थों की महंगाई दर 8.6 प्रतिशत तक रही है। कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स को खाद्य पदार्थो के महंगे दाम ने खासा प्रभावित किया है।
अभी और बढ़ सकती है मुद्रास्फिती
जानकारों का कहना यह है कि चिंता यह है कि इस प्रवृत्ति को जल्द ही कभी भी बदलने की संभावना नहीं है। अगर महंगाई के दर ऐसे ही बढ़ती रही तो आरबीआई को फिर से दरों को बढ़ाना पड़ सकता है। जानकार यह भी कहते हैं कि वैश्विक हालात को देखते हुए ऐसा प्रतित नहीं होता की यह जल्द ही खत्म होने वाला है।
महंगाई बढ़ने के हैं कई कारक
नाइट फ्रैंक इंडिया के निदेशक-शोध के निदेशक विवेक राथी की कहना है कि 7.41 प्रतिशत की मगंगाई दर खाद्य पदार्थों की कीमतों में उछाल के चलते रही है। रुपए में गिरावट और कच्चे तेल के आयात पर मूल्य पर दबाव से महंगाई पर खासा फर्क पड़ा है। इसके अतिरिक्त अन्य भी कई कारक हैं जैसे कि इनपुट लागतों में इजाफा और सेवा क्षेत्र में महंगाई ने भी मुद्रास्फीति पर असर डाला है। अभी भी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स आरबीआई के 4 प्रतिशत के लिमिट से काफी ज्यादा है। जानकारों के मुताबिक महंगाई की मार से सबेस ज्यादा प्रभावित मीडिल क्लास और लोवर मीडिल क्लास के लोग हैं।
पिछले साल के मुकाबले महंगाई में हुआ है इजाफा
सितंबर के महीने के लिए सीपीआई में वार्षिक आधार पर बढ़ोत्तरी हुई है। पिछले साल सितंबर में महंगाई दर 7.3 प्रतिशत थी जो इस साल सितंबर में 7.41 प्रतिशत है। खाद्य पदार्थ के उच्छ कीमतों में अनाज की कीमतों ने CPI में सबसे अधिक योगदान दिया है अनाज की कीमते 11.53 प्रतिशत महंगी रही है। ऐसा ही रहा तो आरबीआई एक बार फीर दरो में बढ़ोत्तरी कर सकता है। वैश्विक कारकों के वजह से विश्व में मंदी की आशंका है। ऐसे में महंगाई को काबू कर पाना बेहद ही मुश्किल लग रहा है। पिछले पांच महीने में आरबीआई ने रेपो दरो में 190 आधार अंकों की बढ़ोत्तरी की है। जानकारों का कहना है कि आगे भी बढ़ोत्तरी जारी रह सकती है।


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