कोरोना वायरस महामारी के कारण पूरे देश में लॉकडाउन के बावजूद एक अप्रैल से बैंकों के विलय हो जाएगा।
नई दिल्ली: कोरोना वायरस महामारी के कारण पूरे देश में लॉकडाउन के बावजूद एक अप्रैल से बैंकों के विलय हो जाएगा। जी हां कोरोना वायरस से निपटने के लिए 21 दिवसीय राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन से देश के 10 प्रमुख सरकारी बैंकों की विलय प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ेगा और एक अप्रैल से बैंकों का विलय प्रभावी हो जाएगा। जानकारी दें कि केंद्रीय मंत्रिमडल ने इस महीने की शुरुआत में सार्वजनिक क्षेत्र के 10 बैंकों का विलय चार बैंकों में करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस विलय को अगले वित्त वर्ष से प्रभाव में आना है।
कोराना के कारण विलय प्रक्रिया आगे बढ़ाने का आग्रह
कोरोना वायरस के संकट को देखते हुए जब वित्त मंत्री से इस बात की भी जानकारी ली गई कि क्या सरकार सरकारी बैंकों के विलय की समयसीमा बढ़ाने पर विचार कर रही है, तो उन्होंने कहा कि फिलहाल ऐसा कुछ नहीं है। वहीं बैंक मामलों के सचिव देबाशीष पांडा ने कहा कि विलय प्रक्रिया पटरी पर है। वहीं उन्होंने उम्मीद जतायी कि बैंक क्षेत्र कोरोना महामारी की चुनौती से पार पा लेगा। ऑल इंडिया बैंक आफिसर्स कान्फेडरेशन (एआईबीओसी) ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद मोदी से कोराना वायरस मामले को देखते हुए विलय प्रक्रिया आगे बढ़ाने का आग्रह किया।
जानिए किन बैंकों का होगा मर्जर
प्रस्तावित विलय के तहत ओरिएंटल बैंक ऑफ कामर्स और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया का विलय पंजाब नेशनल बैंक में, सिंडिकेट बैंक का केनरा बैंक में, आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक का यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और इलाहबाद बैंक का इंडियन बैंक में विलय होना है। बता दें कि इस विलय के बाद देश में सात बड़े आकार के बैंक होंगे जिनका कारोबार 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक का होगा। विलय के बाद देश में सात बड़े बैंक, पांच छोटे बैंक रह जाएंगे। वर्ष 2017 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की संख्या 27 थी।
ग्राहकों पर ऐसे पड़ेगा असर
- ग्राहकों को नया अकाउंट नंबर और कस्टमर आईडी मिल सकता है।
- जिन ग्राहकों को नए अकाउंट नंबर या आईएफएससी कोड मिलेंगे, उन्हें नए डीटेल्स इनकम टैक्स डिपार्टमेंट, इंश्योरंस कंपनियों, म्यूचुअल फंड, नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) आदि में अपडेट करवाने होंगे।
- एसआईपी या लोन ईएमआई के लिए ग्राहकों को नया इंस्ट्रक्शन फॉर्म भरना पड़ सकता है।
- इसके साथ ही नई चेकबुक, डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड इश्यू हो सकता है।
- फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) या रेकरिंग डिपॉजिट (आरडी) पर मिलने वाले ब्याज में कोई बदलाव नहीं होगा।
- जिन ब्याज दरों पर व्हीकल लोन, होम लोन, पर्सनल लोन आदि लिए गए हैं, उनमें कोई बदलाव नहीं होगा।
- वहीं कुछ शाखाएं बंद हो सकती हैं, इसलिए ग्राहकों को नई शाखाओं में जाना पड़ सकता है।
- जबकि मर्जर के बाद एंटिटी को सभी इलेक्ट्रॉनिक क्लीयरिंग सर्विस (ईसीएस) निर्देशों और पोस्ट डेटेड चेक को क्लीयर करना होगा।


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