सरकार के पास खत्म हो रहा पैसा, खटखटाना पड़ सकता है आरबीआई का दरवाजा

नयी दिल्ली। केंद्र सरकार के पास बहुत जल्द बजट की फंडिंग के ऑप्शन खत्म हो सकते हैं। सरकार को सहारे के लिए एक बार फिर से आरबीआई का दरवाजा खटखटाना पड़ सकता है। प्रशासन राजस्व को बढ़ावा देने के लिए आरबीआई को सीधे सॉवरेन बांड खरीदने या लाभांश को बढ़ावा देने को कह सकती है। मालूम हो कि कोरोना और लॉकडाउन के कारण सरकार की इनकम को तगड़ा झटका लगा है। सरकार जीडीपी के 7 प्रतिशत के उच्च बजट घाटे का सामना कर रही है, जो पिछले 2 दशकों में सर्वाधिक है।

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आरबीआई के सामने दुविधा
आरबीआई ने अभी तक सैकंडरी मार्केट में कुछ डिस्क्रीट बॉन्ड की खरीदारी की है, लेकिन सरकार के इस ऋण प्रबंधक को एक ऐसी योजना की रूपरेखा तैयार करनी अभी बाकी है कि जिसके जरिए चालू वित्त वर्ष में सरकार के रिकॉर्ड 12 ट्रिलियन रुपये (160 बिलियन डॉलर) का प्रबंधन किया जा सके। इस बीच एक्सपर्ट कहते हैं कि बैंकों ने पहले ही कई बांड खरीद लिए हैं और अर्थव्यवस्था में मंदी के बीच उनके पास फर्मों को उधार देने के कम ही अवसर होंगे।

रेटिंग में कटौती एक और जोखिम
एक संभावित क्रेडिट रेटिंग डाउनग्रेड भारत के लिए एक और जोखिम है, जो इस साल चार दशकों से अधिक समय में अपनी पहली आर्थिक गिरावट की ओर बढ़ रहा है। एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का क्रेडिट स्कोर फिच रेटिंग्स और मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस के पास 'जंक' से केवल एक कदम दूर है। ब्लूमबर्ग के सर्वे में अर्थशास्त्रियों ने उम्मीद लगाई थी कि इस साल देश का राजकोषीय घाटा जीडीपी के 7 फीसदी पर पहुंच जाएगा, जो 1994 में आखिरी बार इतना ऊपर पहुंचा था। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार देश का पब्लिक डेब्ट अगले वर्ष जीडीपी के 85.7 प्रतिशत तक बढ़ेगा, जो इस समय लगभग 70 प्रतिशत है।

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