नई दिल्ली, जुलाई 24। सरकार रसोई गैस सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी को खत्म कर सकती है। सरकार ने यह जानकारी संसद में दी गई है। केंद्र सरकार ने 2020-21 में एलपीजी सब्सिडी के रूप में 11,896 करोड़ रुपए खर्च किए थे, वहीं 2021-22 में यह खर्च घटकर महज 242 करोड़ रुपए रह गया है। इस तरह सरकार ने रसोई गैस सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी को खत्म कर एक वित्त वर्ष में ही 11,654 करोड़ रुपए बचा लिए।
सरकार ने 2021-22 सब्सिडी पर बेहद मामूली रकम खर्च की
संसद में पेश आंकड़ों के अनुसार, वित्तवर्ष 2017-18 में LPG सब्सिडी पर 23,464 करोड़ रुपए खर्च हुए थे, जो वित्त वर्ष 2018-19 में 37,209 करोड़ रुपए पहुंच गया था। उसके बाद सरकार ने लोगों से सब्सिडी छोड़ने की अपील की जिससे वित्तवर्ष 2019-20 में सरकार का खर्च घटकर 24,172 करोड़ पर आ गया। 2020-21 में इसमें करीब 50 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई और सब्सिडी का खर्च घटकर 11,896 करोड़ रुपए रह गया। उसके बाद 2021-22 में सरकार ने बेहद मामूली रकम खर्च की।
सिर्फ उज्ज्वला योजना वालों को मिल रही सब्सिडी
केन्द्र सरकार ने जून 2020 में यह फैसला लिया था कि एलपीजी गैस सिलेंडर पर सब्सिडी प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को ही दी जाएगी। जो राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में जमा कर दी जाती है। सरकार ने पीएमयूवाई लाभार्थियों के लिए एक साल में 12 रीफिल तक के लिए 200 रुपए प्रति सिलेंडर की सब्सिडी शुरू की है।
भारत में 30 करोड़ लोगो के पास रसोई गैस कनेक्शन
1 साल में दिल्ली में रसोई गैस सिलेंडर की 834.50 से बढ़ कर 1053 हो गई है। मतलब एक साल में रसोई गैस सिलेंडर कीमत 218.50 रुपए बढ़ी है। इस पर मिलने वाली सब्सिडी भी खत्म कर दी गई है। भारत में लगभग 30 करोड़ लोगों के पास एलपीजी कनेक्शन है। इसमें उज्ज्वला योजना के तहत 9 करोड़ से ज्यादा एलपीजी कनेक्शन शामिल हैं।


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